बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई ऐतिहासिक वोटिंग ने पूरे राज्य का माहौल बदल दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को औरंगाबाद की जनसभा में इस रिकॉर्ड मतदान को लोकतंत्र का उत्सव बताया.
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और किसानों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि जनता विकास की राह पर चलना चाहती है और किसी भी कीमत पर ‘जंगलराज’ की वापसी नहीं होने देगी.
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस बार बिहार की महिलाओं, किसानों और युवाओं ने तय कर लिया है कि राज्य में एनडीए की सरकार ही रहेगी. उन्होंने कहा कि पहले चरण की वोटिंग ने यह साफ कर दिया है कि जनता स्थायी विकास और सुशासन चाहती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मतदान सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि बिहार के आत्मविश्वास और जागरूकता का प्रतीक है.
मोदी ने अपने भाषण में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार की जनता ने यह तय कर लिया है कि वह फिर से ‘जंगलराज’ के अंधकार में नहीं लौटेगी. उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था, शिक्षा और रोजगार के लिए जो काम हुए हैं, उन्हें जनता ने देखा है और अब वे स्थिर सरकार को ही समर्थन देंगे.
पहले चरण में NDA के पक्ष में बंपर वोटिंग से महागठबंधन में खलबली है और दूसरे चरण के लिए औरंगाबाद का ये जोश बता रहा है कि विपक्ष का सफाया तय है। https://t.co/XkFC3QBZv0
— Narendra Modi (@narendramodi) November 7, 2025
वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले चरण में ऐतिहासिक मतदान के लिए मतदाताओं का आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह जनता का विश्वास और सहयोग ही है जिसने बिहार को विकास के नए मुकाम पर पहुंचाया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, 'पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के लिए जनता का दिल से धन्यवाद. अब समय है बिहार को सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने का.'
चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में 64.66 प्रतिशत मतदान हुआ, जो बिहार के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे अधिक है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 1951 के बाद यह सबसे ऊंचा मतदान प्रतिशत है. उन्होंने मतदाताओं और चुनावकर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि बिहार ने पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव की मिसाल पेश की है.
पहले चरण की सफलता के बाद अब सभी की नजरें 11 नवंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान पर हैं. राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है. एनडीए जहां अपने प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश में है, वहीं विपक्षी दल मतदाताओं को नए वादों के साथ लुभाने में जुटे हैं. बिहार का यह चुनाव आने वाले वर्षों की दिशा तय करेगा.