बिहार में डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम की विश्वसनीयता एक बार फिर सवालों के घेरे में है. पहले पटना में 'डॉग बाबू' के नाम से निवास प्रमाण पत्र जारी होने की घटना सामने आई थी, और अब राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसे कई फर्जी और अजीबोगरीब आवेदन सामने आ रहे हैं, जो सरकारी प्रमाण पत्र प्रक्रिया की गंभीर खामियों की ओर इशारा कर रहे हैं.
ताजा मामला मधेपुरा से आया है, जहां एक आवेदक ने अपने नाम में फोन, पिता के नाम में मोबाइल और मां के नाम में बैटरी दर्ज किया है. इसी तरह समस्तीपुर से एक और वायरल आवेदन में नाम पैशन प्रो, पिता का नाम अपाचे बाइक एजेंसी और मां का नाम पेट्रोल भरा गया है. यह स्पष्ट संकेत देता है कि आवेदन पत्र बिना किसी प्राथमिक जांच या सत्यापन के ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज हो रहे हैं.
नवादा जिले से डोगेश बाबू नाम के एक आवेदक का मामला भी सामने आया है, जिसमें उनके पिता का नाम डोगेश के पापा और मां का नाम डोगेश की मम्मी लिखा गया है. इससे पहले मोतिहारी में सोनालिका ट्रैक्टर नाम से निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया था, जिसमें भोजपुरी अभिनेत्री मोनालिसा की तस्वीर भी लगाई गई थी. हालांकि वह प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ, लेकिन आवेदन का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया.
इन सभी घटनाओं ने राज्य सरकार की प्रमाण पत्र सत्यापन प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है. अब सवाल उठ रहा है कि यह केवल लापरवाही है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा? फिलहाल सभी जिलों के जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और ऐसे मामलों की गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. दोषियों पर आईटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में सख्त कार्रवाई की तैयारी है.