बुरी तरह फंस गए IAS संजीव हंस, ED ने तीन महानगरों में जब्त की करोड़ों की 7 संपत्तियां
IAS Sanjeev Hans: बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस के खिलाफ ईडी ने कार्रवाई करते हुए उनकी 7 संपत्तियां जब्त की हैं. ये संपत्तियां दिल्ली, नागपुर और जयपुर में स्थित हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 23 करोड़ 72 लाख रुपये है. ये संपत्तियां संजीव हंस के सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई थीं. ईडी ने 3 दिसंबर को 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी.

IAS Sanjeev Hans: बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट (ED) ने संजीव हंस के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने सोमवार को संजीव हंस की 7 संपत्तियों को जब्त कर लिया है. ये संपत्तियां दिल्ली, नागपुर और जयपुर में स्थित हैं. जब्त की गई संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 23 करोड़ 72 लाख रुपये बताई जा रही है.
कहां-कहां हुई संपत्तियां जब्त: ईडी ने नागपुर में तीन प्लॉट, दिल्ली में एक फ्लैट और जयपुर में तीन फ्लैट को जब्त किया है. ये संपत्तियां संजीव हंस के करीबी सहयोगियों प्रवीण चौधरी और पुष्पराज बजाज के नाम पर खरीदी गई थीं. बता दें कि इससे पहले 3 दिसंबर को ईडी ने संजीव हंस और उनके सहयोगियों के दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर, नागपुर सहित कुल 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी.
छापेमारी में मिले थे कई सबूत:
ईडी की छापेमारी के दौरान कई अहम साक्ष्य मिले थे. जांच में यह खुलासा हुआ कि संजीव हंस और उनके सहयोगियों ने रियल एस्टेट और शेयर बाजार में भारी निवेश किया है. इसमें लगभग 60 करोड़ रुपये के शेयरों में निवेश और 18 करोड़ रुपये की रियल एस्टेट संपत्तियों का निवेश सामने आया. इसके अलावा ईडी को पता चला कि मोहाली और कसौली में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियां भी अर्जित की गई हैं.
कौन-कौन हैं संजीव हंस के सहयोगी:
ईडी की जांच में संजीव हंस के साथ उनके करीबी पूर्व विधायक गुलाब यादव का नाम भी सामने आया है. इसके अलावा प्रवीण चौधरी और पुष्पराज बजाज जैसे नामी लोग भी इस पूरे मामले में संजीव हंस के मददगार बताए जा रहे हैं. इन सभी के खिलाफ जांच जारी है और कई बेनामी संपत्तियों का खुलासा हुआ है.
ईडी की कार्रवाई क्यों हुई:
ईडी ने संजीव हंस और उनके सहयोगियों के खिलाफ यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के आधार पर की है. छापेमारी में मिले दस्तावेजों से ईडी ने माना कि संजीव हंस ने भ्रष्टाचार के जरिए अवैध संपत्तियां अर्जित की हैं और उन्हें अपने सहयोगियों के नाम पर खरीदा है.
ईडी की इस कार्रवाई के बाद संजीव हंस की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. अब तक की जांच में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियों का पता चल चुका है. इस मामले में संजीव हंस और उनके करीबी लोगों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना है.
इस घटना से साफ होता है कि सरकारी पद पर रहते हुए संजीव हंस ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की संपत्तियां अर्जित कीं. ईडी की जांच अभी भी जारी है और आने वाले समय में और खुलासे होने की उम्मीद है.
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