लैंड फॉर जॉब्स मामले में राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) को बड़ा झटका लगा है. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने मंगलवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी (Central Bureau of Investigation) द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. अदालत ने साफ कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है. इस फैसले के बाद मामले की जांच पहले की तरह जारी रहेगी और यादव को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है.
यह मामला उस समय से जुड़ा है जब लालू यादव रेल मंत्री थे. आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले जमीन ली गई. यह नियुक्तियां मुख्य रूप से जबलपुर स्थित वेस्ट सेंट्रल जोन में हुई थीं. जांच एजेंसी का कहना है कि जमीनें यादव के परिवार या करीबी लोगों के नाम पर ट्रांसफर की गई थीं, जिससे पूरे मामले में अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं.
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिका में ठोस आधार नहीं है. कोर्ट ने इसे “बेबुनियाद” बताते हुए खारिज कर दिया. यादव ने दलील दी थी कि जांच शुरू करने से पहले जरूरी कानूनी मंजूरी नहीं ली गई, इसलिए एफआईआर अमान्य है. हालांकि अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं है.
इस फैसले के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी की जांच पहले की तरह जारी रहेगी. यह मामला 18 मई 2022 को दर्ज किया गया था, जिसमें कई अन्य आरोपी भी शामिल हैं. इनमें यादव की पत्नी, उनकी बेटियां, कुछ सरकारी अधिकारी और निजी व्यक्ति शामिल हैं. सभी आरोपियों पर भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप हैं.
फिलहाल लालू यादव और अन्य आरोपी जमानत पर बाहर हैं, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. इस फैसले के बाद अब जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई तेज कर सकती है. आने वाले समय में चार्जशीट और सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिससे यह मामला और अहम मोड़ ले सकता है.