पटना: बिहार के समस्तीपुर जिले से पुलिस हिरासत में कथित अमानवीय व्यवहार का एक गंभीर मामला सामने आया है. चोरी के शक में पकड़े गए एक ज्वेलरी दुकान कर्मचारी के साथ हिरासत में मारपीट और पेट्रोल डालकर कबूलनामा कराने का आरोप लगा है. चार दिन बाद रिहा होने पर उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह अब अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है. मामले के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है.
यह मामला दिसंबर में समस्तीपुर की एक ज्वेलरी दुकान से 60 ग्राम सोना चोरी होने के बाद सामने आया. दुकान में काम करने वाले युवक और उसके दो साथियों को पुलिस ने हिरासत में लिया. आरोप है कि इससे पहले दुकान मालिक ने भी कर्मचारियों के साथ मारपीट की और उन्हें छत से फेंकने की धमकी दी. 31 दिसंबर को पुलिस ने तीनों को थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की.
पीड़ित युवक का आरोप है कि चार दिन की पुलिस हिरासत के दौरान उसे लगातार पीटा गया. उसने दावा किया कि कबूलनामा कराने के लिए उसके निजी अंगों पर पेट्रोल डाला गया. घर की तलाशी में कोई चोरी का सामान नहीं मिलने के बावजूद उस पर दबाव बनाया गया. हालत बिगड़ने पर उसे 5 जनवरी को जमानत पर छोड़ा गया.
हिरासत से छूटने के बाद युवक जब घर पहुंचा तो उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक की मारपीट और मानसिक तनाव से उसकी स्थिति नाजुक हो गई है. परिवार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो हालात इतने खराब नहीं होते.
पीड़ित की मां ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाया गया. उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें और उनके पति को भी ताजपुर थाने में तीन दिन तक बैठाए रखा. परिवार से 50 हजार रुपये की मांग की गई ताकि उन्हें छोड़ा जा सके. इस दौरान घर की तलाशी ली गई, लेकिन कोई गहना बरामद नहीं हुआ.
मामले की गंभीरता को देखते हुए समस्तीपुर के एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने त्वरित कार्रवाई की. उन्होंने थानाध्यक्ष शंकर शरण दास सहित तीन पुलिसकर्मियों राजवंश कुमार और राहुल कुमार को निलंबित कर दिया. एसपी ने कहा कि हिरासत में हिंसा के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा.