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'सामने वाली सीट हमेशा...', तेजस्वी की रथ पर बैठे संजय यादव तो रोहिणी को नहीं आया पसंद, सोशल मीडिया पर कह डाली ये बात

Bihar Chunav: तेजस्वी यादव की 'बिहार अधिकार यात्रा' के दौरान एक नई विवाद उत्पन्न हुआ, जब उनके करीबी सहयोगी संजय यादव की तस्वीर वायरल हुई. तस्वीर में संजय रथ की सामने वाली सीट पर बैठे थे, जो हमेशा से तेजस्वी और लालू के लिए आरक्षित मानी जाती है. रोहिणी आचार्य ने इसे लेकर असंतोष जताया.

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Edited By: Princy Sharma
'सामने वाली सीट हमेशा...', तेजस्वी की रथ पर बैठे संजय यादव तो रोहिणी को नहीं आया पसंद, सोशल मीडिया पर कह डाली ये बात
Courtesy: Pinterest

Bihar Elections 2025: बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की 'बिहार अधिकार यात्रा' के दौरान एक नया विवाद उत्पन्न हो गया है. यह विवाद तब उभरा जब तेजस्वी के करीबी सहयोगी और पार्टी सांसद संजय यादव की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. तस्वीर में संजय यादव तेजस्वी की खास बनाई गई रथ की सामने वाली सीट पर बैठे हुए थे , जबकि तेजस्वी वहां मौजूद नहीं थे. 

रथ की यह विशेष सीट हमेशा से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी तेजस्वी और उनके पिता लालू प्रसाद यादव के लिए आरक्षित मानी जाती रही है. इस घटना ने पार्टी में हलचल मचा दी है , खासकर लालू की बेटी रोहिणी आचार्य के बीच. रोहिणी ने इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए स्पष्ट संकेत दिए कि संजय यादव का यह कदम पार्टी के अंदर असहमति का कारण बन सकता है. 

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा , 'सामने वाली सीट हमेशा शीर्ष नेताओं के लिए आरक्षित होती है और उनके बिना किसी को वहां नहीं बैठना चाहिए.' उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति खुद को शीर्ष नेतृत्व से ऊपर समझता है , तो यह अलग बात है. हालांकि , रोहिणी ने खुद कोई बयान नहीं दिया , लेकिन उनके इस पोस्ट से यह स्पष्ट हुआ कि परिवार में संजय यादव को लेकर कुछ असंतोष है. 

तेज प्रताप यादव ने भी कई बार साधा था निशाना

यह पहली बार नहीं था जब संजय यादव को आलोचना का सामना करना पड़ा. इससे पहले , तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव , जिन्हें बाद में पार्टी से निकाल दिया गया था उन्होंने भी संजय पर कई बार निशाना साधा था. हालांकि , राज्य RJD प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इस पूरे मामले को नकारते हुए कहा कि पार्टी में कोई विवाद नहीं है. फिर भी , इस घटना ने पार्टी के अंदर चल रही परिवारिक राजनीति को और ज्यादा उजागर कर दिया है.