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बिहार के किस एग्जिट पोल में एनडीए आगे, लेकिन तेजस्वी बने सीएम की पहली पसंद

राजद नेता तेजस्वी यादव मतदाताओं की पसंदीदा मुख्यमंत्री पद की पसंद बने हुए हैं। एक्सिस माई इंडिया के एक सर्वे के अनुसार सर्वे में शामिल 34% लोग तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद पर देखना चाहते हैं.

Kanhaiya Kumar Jha
बिहार के किस एग्जिट पोल में एनडीए आगे, लेकिन तेजस्वी बने सीएम की पहली पसंद
Courtesy: Social Media

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जारी विभिन्न एग्जिट पोल भले ही एनडीए गठबंधन को बहुमत मिलने और सरकार बनाने की संभावना जता रहे हों, लेकिन मुख्यमंत्री पद की पसंद के मामले में जनता की राय कुछ अलग दिखाई दे रही है.

एक्सिस माई इंडिया के एक सर्वे के अनुसार, मतदाताओं का बड़ा हिस्सा अब भी राजद नेता तेजस्वी यादव को राज्य का मुख्यमंत्री बनते देखना चाहता है. सर्वे में शामिल लोगों में से लगभग 34 प्रतिशत ने तेजस्वी यादव को सीएम पद की अपनी पहली पसंद बताया.

नीतीश कुमार को भी मिल रहा जनसमर्थन

सर्वेक्षण के अनुसार, 22 प्रतिशत लोग बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) प्रमुख नीतीश कुमार को अपने पद पर बने रहना चाहते हैं. 14 प्रतिशत मतदाता भाजपा के अन्य उम्मीदवारों को पसंद करते हैं, जबकि 5 प्रतिशत मतदाता केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को बिहार के शीर्ष पद पर देखना चाहते हैं. 

प्रशांत किशोर को इतने प्रतिशत लोगों का साथ

एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के अनुसार, 4 प्रतिशत लोग प्रशांत किशोर, जिनकी पार्टी जन सुराज पार्टी (जेएसपी) बिहार विधानसभा चुनावों में पदार्पण कर रही है, को अगला मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं. 

बिहार की राजनीति में नतीजों से पहले हलचल

यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भले ही एनडीए राजनीतिक तौर पर मजबूत स्थिति में दिख रहा हो, मगर तेजस्वी यादव की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. बिहार की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में तेजस्वी यादव ने खुद को स्थापित किया है. उन्होंने बेरोजगारी, शिक्षा, और महंगाई जैसे मुद्दों को लगातार उठाया है, जिससे युवा वर्ग में उनकी पकड़ मजबूत हुई है.

अधिकांश एग्जिट-पोल्स में NDA की पूर्ण बहुमत की सरकार

गौरतलब है कि वोटिंग समाप्ति के बाद जारी अधिकांश एग्जिट-पोल्स यह इशारा दे रहे हैं कि बिहार में एनडीए को पर्याप्त बहुमत मिलने की संभावना है. अधिकांश सर्वे यह बताते हैं कि एनडीए संभवतः 130-160 सीटों के बीच सीटें जीत सकता है, जबकि महागठबंधन का आंकड़ा अपेक्षाकृत कम लगभग 70-110 सीटों के बीच दिख रहा है.