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भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहुंचा दिल्ली, जंतर-मंतर पर भाई ने समर्थकों संग खोला मोर्चा

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्याय की मांग तेज हो गई है. परिजन जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे हैं, जबकि न्यायिक जांच आयोग के सामने माता-पिता ने अपने बयान दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है.

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भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहुंचा दिल्ली, जंतर-मंतर पर भाई ने समर्थकों संग खोला मोर्चा
Courtesy: Social Media

पटना: बिहार के भोजपुर जिले से जुड़े चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है. न्याय की मांग को लेकर भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे और धरने पर बैठ गए. प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई. इस बीच बिहार में गठित न्यायिक जांच आयोग ने भी मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी है.

धरने का नेतृत्व कर रहे चंदन तिवारी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद भी संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि परिवार केवल निष्पक्ष जांच चाहता है और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सरकार से मामले में पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की.

आयोग के सामने दर्ज हुए बयान

मामले की न्यायिक जांच के तहत राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग के समक्ष शनिवार को भरत तिवारी के माता-पिता ने अपने बयान दर्ज कराए. आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा कर रहे हैं. दोनों के बयान अलग-अलग दर्ज किए गए. बयान के बाद भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने बताया कि उन्होंने आयोग को घटना वाले दिन की पूरी जानकारी विस्तार से दी है.

पिता ने क्या बताया?

काशीनाथ तिवारी के अनुसार, घटना के दिन पुलिस उन्हें थाने ले गई थी और पूरे दिन वहीं रखा गया. उनका कहना है कि उन्होंने आयोग को यही तथ्य बताए हैं ताकि जांच में घटनाक्रम का हर पहलू सामने आ सके. परिवार का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी और उन्हें न्याय मिलेगा.

एनकाउंटर को लेकर दो अलग-अलग दावे

भरत तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले थे. 17 जून 2026 को पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उन्हें गोली लगी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई. पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी हथियारबंद थे और पुलिस टीम पर फायरिंग कर रहे थे. जवाबी कार्रवाई में उन्हें गोली लगी. वहीं, परिजनों का आरोप है कि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई.

जांच के नतीजों पर टिकी नजर

मामले में पुलिस और परिवार के दावों के बीच बड़ा अंतर होने के कारण न्यायिक जांच आयोग की भूमिका अहम मानी जा रही है. आयोग सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रहा है. दूसरी ओर, परिवार का आंदोलन भी जारी है. अब सबकी नजर आयोग की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है, जिससे इस बहुचर्चित मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है.