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बंगाल जीत में निभाई बड़ी भूमिका, फिर भी ‘टीम नवीन’ से बाहर क्यों हुए अमित मालवीय? जानें अंदर की कहानी

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में अमित मालवीय को जगह नहीं मिली है. लंबे समय तक आईटी सेल संभालने वाले मालवीय की जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी सूत्र इसे प्रदर्शन से ज्यादा संगठनात्मक संतुलन और भविष्य की भूमिका से जोड़ रहे हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
बंगाल जीत में निभाई बड़ी भूमिका, फिर भी ‘टीम नवीन’ से बाहर क्यों हुए अमित मालवीय? जानें अंदर की कहानी
Courtesy: social media

नई दिल्ली: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए कई नेताओं को नई जिम्मेदारियां दीं. सबसे ज्यादा चर्चा अमित मालवीय को आईटी और सोशल मीडिया विभाग से हटाए जाने की है. पश्चिम बंगाल में पार्टी की सफलता में अहम भूमिका निभाने के बावजूद मालवीय को नई टीम में जगह नहीं मिली. आखिर इसकी वजह क्या है?

बदलाव के पीछे संगठनात्मक गणित

पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मालवीय को हटाने का फैसला अचानक नहीं हुआ. 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद उन्होंने खुद भी नेतृत्व के सामने नई जिम्मेदारी संभालने की इच्छा जताई थी. नई टीम तैयार करते समय उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा हुई और कई नामों पर विचार किया गया. बताया जाता है कि नए चेहरे की तलाश में मालवीय की राय भी ली गई थी. इसलिए इसे किसी हालिया विवाद या सोशल मीडिया प्रदर्शन से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी.

उत्तर प्रदेश का समीकरण भी अहम

मालवीय उत्तर प्रदेश से आते हैं और ब्राह्मण समुदाय से हैं. नई टीम में इसी राज्य से हरीश द्विवेदी को महासचिव बनाया गया है. स्मृति ईरानी को भी महासचिव की जिम्मेदारी मिली है, जबकि रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को उपाध्यक्ष बनाया गया है. ऐसे में पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि समान सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को देखते हुए मालवीय को उसी स्तर की दूसरी जिम्मेदारी देना आसान नहीं था. इसके अलावा उनकी उम्र भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या सचिव जैसे पदों के लिए वरिष्ठता के लिहाज से एक सीमा मानी जा रही है.

बंगाल में भूमिका के बावजूद नई जिम्मेदारी नहीं

अमित मालवीय पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल में भाजपा के सह-प्रभारी भी रहे हैं. हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका को संगठन के भीतर महत्वपूर्ण माना गया. इसके बावजूद नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें कोई पद नहीं मिला. हालांकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी में मालवीय की भूमिका खत्म हो गई है. उनके लिए आगे कोई दूसरी जिम्मेदारी तय की जा सकती है.

नए आईटी प्रमुख के सामने बड़ी चुनौती

मालवीय के लंबे कार्यकाल में भाजपा ने डिजिटल राजनीति में अपनी मौजूदगी काफी मजबूत की. पार्टी के सोशल मीडिया खातों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल पहुंच भी लगातार बढ़ी. अब दीपक म्हास्के के सामने इस विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी. खासकर युवा और Gen Z मतदाताओं तक पहुंच बनाना, विपक्ष के डिजिटल अभियान का जवाब देना और बदलते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पार्टी का प्रभाव बनाए रखना उनकी प्रमुख चुनौतियों में शामिल होगा.