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कौन हैं शुभदीप घोष? गौतम गंभीर की कोचिंग टीम में जल्द मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. BCCI जल्द ही शुभदीप घोष को गौतम गंभीर की कोचिंग टीम में शामिल कर सकता है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
कौन हैं शुभदीप घोष? गौतम गंभीर की कोचिंग टीम में जल्द मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
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भारतीय क्रिकेट टीम में फील्डिंग को मजबूत बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. BCCI जल्द ही असम के पूर्व क्रिकेटर शुभदीप घोष को सीनियर टीम के सपोर्ट स्टाफ में शामिल कर सकता है. माना जा रहा है कि वह फील्डिंग विभाग में नई जिम्मेदारी संभालेंगे.

गौतम गंभीर की टीम में क्यों मिल रही है जगह?

सूत्रों के अनुसार, BCCI ने टी दिलीप का कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है. इसके बाद शुभदीप घोष को सीनियर टीम के फील्डिंग सेटअप से जोड़ने की तैयारी है. हाल के महीनों में भारतीय टीम की फील्डिंग को लेकर लगातार सवाल उठे हैं. कई अहम मैचों में आसान कैच छूटे, ग्राउंड फील्डिंग में गलतियां हुईं और स्लिप में भी मौके गंवाए गए. ऐसे में मुख्य कोच गौतम गंभीर एक ऐसा विशेषज्ञ चाहते हैं जो खिलाड़ियों की तकनीक पर सीधा काम करे और मैदान पर गलतियों को कम करने में मदद करे. इसी वजह से शुभदीप घोष का नाम सबसे आगे माना जा रहा है.

घरेलू क्रिकेट से NCA तक का सफर

57 वर्षीय शुभदीप घोष असम के डिगबोई के रहने वाले हैं. घरेलू क्रिकेट में उन्हें 'जॉय' के नाम से जाना जाता था. उन्होंने 1994 से 2005 के बीच असम और रेलवे के लिए फर्स्ट क्लास और लिस्ट-ए क्रिकेट खेला. खिलाड़ी के रूप में उनकी पहचान तेज फील्डिंग और फिटनेस के लिए थी. क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की राह चुनी और पिछले कई वर्षों से नेशनल क्रिकेट एकेडमी, जिसे अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कहा जाता है, में खिलाड़ियों के साथ काम कर रहे हैं. युवा खिलाड़ियों की फील्डिंग और फिटनेस पर उनका खास ध्यान रहता है.

IPL और महिला टीम के साथ भी निभाई अहम भूमिका

शुभदीप घोष के पास फ्रेंचाइजी क्रिकेट का भी अच्छा अनुभव है. वह 2014 में IPL चैंपियन बनी कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के साथ जुड़े रहे. इसके बाद उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स में भी फील्डिंग कोच की जिम्मेदारी संभाली. साल 2021 में उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी काम किया. इसके अलावा इंडिया ए और अंडर-19 टीमों के साथ भी उनकी भूमिका रही है. उनकी कोचिंग शैली में लगातार अभ्यास, तेज प्रतिक्रिया और साफ तकनीक पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है.