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सर्वेश का सिल्वर, तेजस्विन का साथ: CWG हाई जंप फाइनल बना यादगार

सर्वेश कुशारे ने कॉमनवेल्थ गेम्स हाई जंप में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीता. चोटिल तेजस्विन शंकर ने मैदान छोड़ने के बजाय साथी का साथ दिया और उनकी सलाह ने इस यादगार जीत में अहम भूमिका निभाई.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
सर्वेश का सिल्वर, तेजस्विन का साथ: CWG हाई जंप फाइनल बना यादगार
Courtesy: X

ग्लासगो में हुआ कॉमनवेल्थ गेम्स का पुरुष हाई जंप फाइनल सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं रहा, बल्कि दोस्ती, हिम्मत और खेल भावना की मिसाल भी बन गया. सर्वेश कुशारे ने भारत को सिल्वर दिलाया. वहीं चोट के बावजूद तेजस्विन शंकर आखिरी तक उनके साथ खड़े रहे.

तेजस्विन की चोट, लेकिन साथ नहीं छोड़ा

कॉमनवेल्थ गेम्स के हाई जंप फाइनल में भारत के तीन खिलाड़ी उतरे थे. सर्वेश कुशारे, आदर्श राम ज्योति शंकर और तेजस्विन शंकर से पदक की उम्मीद थी. हालांकि तेजस्विन का मुकाबला ज्यादा देर नहीं चल पाया. स्टार्ट लिस्ट में उनका नाम DNS था लेकिन उन्होंने मैदान में उतरने का फैसला किया. 2.05 मीटर की पहली कोशिश के दौरान उनके घुटने में परेशानी हुई और वह बार पार नहीं कर सके. बाद में पता चला कि वह पेटेलर टेंडिनाइटिस से जूझ रहे थे, जिसे आम भाषा में जंपर्स नी भी कहा जाता है. इसके बाद भी तेजस्विन मैदान से बाहर नहीं गए और अपने साथियों का हौसला बढ़ाते रहे.

सर्वेश को मिली तेजस्विन की खास सलाह

तेजस्विन खुद मुकाबले से बाहर हो चुके थे लेकिन उन्होंने अपनी भूमिका एक अनुभवी साथी की तरह निभाई. ठंड भरी रात में वह हाई जंप एरिया के पास खड़े रहे और हर प्रयास को ध्यान से देखते रहे. जब सर्वेश 2.25 मीटर की ऊंचाई पार करने में दो बार असफल हुए, तब तेजस्विन ने उन्हें एक रणनीति बताई. उन्होंने कहा कि शायद 2.25 मीटर छोड़कर सीधे 2.28 मीटर पर कोशिश करना बेहतर होगा. हालांकि सर्वेश ने जोखिम नहीं लिया और अपने आखिरी प्रयास में 2.25 मीटर पार कर लिया. तेजस्विन की मौजूदगी ने उन्हें दबाव के समय अकेला महसूस नहीं होने दिया.

भारत को मिला सिल्वर

इसके बाद मुकाबला सिर्फ सर्वेश और जमैका के रोमेन बेकफोर्ड के बीच रह गया. दोनों खिलाड़ियों ने 2.25 मीटर पार किया लेकिन 2.28 मीटर की ऊंचाई पार नहीं कर सके. काउंटबैक नियम के आधार पर बेकफोर्ड को गोल्ड और सर्वेश को सिल्वर मिला. यह पुरुष हाई जंप में भारत का अब तक का सबसे बड़ा कॉमनवेल्थ पदक है. सर्वेश के लिए यह साल पहले ही शानदार रहा था. उन्होंने 2.30 मीटर पार कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था. नासिक के छोटे गांव से आने वाले सर्वेश ने कठिन हालातों के बीच यह मुकाम हासिल किया. वहीं तेजस्विन की खेल भावना ने इस जीत की कहानी को और खास बना दिया.