रबिंद्र धान्ट की कहानी मेहनत और हिम्मत की मिसाल है. नेपाल के बाझांग गांव से निकले इस फाइटर ने भारत में दिहाड़ी मजदूरी करते हुए अपने खेल का सफर शुरू किया. अब 10-1 के रिकॉर्ड के साथ वह UFC तक पहुंचने से सिर्फ एक जीत दूर हैं.
27 साल के रबिंद्र धान्ट का सफर किसी आसान रास्ते से नहीं गुजरा. नेपाल के बाझांग गांव में उनके लिए MMA में आगे बढ़ने के साधन नहीं थे. बेहतर मौके की तलाश में वह भारत आए और पिथौरागढ़ के बाद दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरी की. इसी दौरान उन्होंने कराटे से जुड़कर कॉम्बैट स्पोर्ट्स में कदम रखा. धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और भारत के रीजनल एमेच्योर सर्किट में उन्होंने 15 मुकाबले बिना हार के पूरे किए. 2019 और 2020 में उन्होंने इंडियन नेशनल एमेच्योर MMA चैंपियनशिप जीती. बाद में ONE चैंपियनशिप और Brave CF जैसे बड़े मंचों पर भी उतरे.
28 मई 2026 को मकाऊ के गैलेक्सी एरिना में धान्ट ने रोड टू UFC में अपना पहला मुकाबला लड़ा. सैकड़ों नेपाली प्रशंसकों के सामने उन्होंने किम्बर्ट एलिनटोजोन को तकनीकी नॉकआउट से हराया और अपने सपने को एक कदम आगे बढ़ाया. इसके बाद उन्हें ‘बाझांग का टाइगर’ नाम मिला. अब उनका रिकॉर्ड 10-1 है और 28 अगस्त को उनका सामना न्यूज़ीलैंड के कासिब मर्डोक से होगा. इस मुकाबले में जीत उन्हें UFC कॉन्ट्रैक्ट दिला सकती है. ऐसा होने पर धान्ट UFC तक पहुंचने वाले नेपाल के पहले फाइटर बन जाएंगे. धान्ट का मानना है कि उन्हें दबाव नहीं, बल्कि देश के लोगों का प्यार और मेहनत करने की प्रेरणा महसूस होती है.
धान्ट अपने खेल के साथ अपनी पहचान बनाने का श्रेय भी MMA को देते हैं. उनका कहना है कि इस खेल ने उन्हें खुद को समझने और अपनी क्षमता पर भरोसा करने में मदद की. उनके बचपन में कोई खास स्पोर्ट्स रोल मॉडल नहीं था, उस समय उनका ध्यान सिर्फ काम और जिंदगी की जरूरतों पर था. बाद में UFC फाइटर्स को देखकर उन्हें अपने लिए एक रास्ता मिला. अब वह अपने देश के युवा MMA खिलाड़ियों के लिए उदाहरण बनना चाहते हैं. मर्डोक की जुबानी चुनौती का जवाब देने के बजाय धान्ट अपनी ट्रेनिंग और सहज समझ पर भरोसा करेंगे. उनका साफ कहना है कि जब तक वह लड़ सकते हैं, तब तक युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने के लिए केज में उतरते रहेंगे.