नई दिल्ली: बांग्लादेश के मक्का समझौते में संभावित शामिल होने की खबर ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. बांग्लादेशी विपक्षी नेता तारिक रहमान ने इस मुद्दे पर कहा है कि ऐसा कोई भी फैसला देश की जरूरतों और जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. वहीं, बांग्लादेश के एक वरिष्ठ राजनयिक के बयान से संकेत मिला है कि ढाका पश्चिम एशिया और मुस्लिम देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहा है.
तारिक रहमान ने कहा कि मक्का समझौते में शामिल होना बांग्लादेश का पूरी तरह संप्रभु और आंतरिक विषय है. उन्होंने कहा कि यदि देश अपने हितों को ध्यान में रखकर कोई निर्णय लेता है, तो किसी दूसरे देश को इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है. यह बयान भारत में उठ रही संभावित रणनीतिक चिंताओं के बीच आया है. बांग्लादेश ने अभी तक औपचारिक रूप से समझौते में शामिल होने की घोषणा नहीं की है.
विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने बताया कि पश्चिम एशिया और मुस्लिम दुनिया के कई देशों से बांग्लादेशी नेतृत्व को लगातार निमंत्रण मिल रहे हैं. उन्होंने संकेत दिया कि यदि पश्चिम एशिया में इस्लामी देशों के बीच कोई सुरक्षा समझौता है, तो उसमें जाना असामान्य नहीं होगा. उनके बयान से यह साफ हुआ कि ढाका मुस्लिम देशों के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को लेकर संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है.
मक्का समझौते में पाकिस्तान की मौजूदगी इस पूरे घटनाक्रम को भारत के लिए खास बनाती है. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से सुरक्षा और आर्थिक संबंध रहे हैं. वर्ष 1971 में बांग्लादेश के गठन के दौरान भारत ने निर्णायक भूमिका निभाई थी. ऐसे में पाकिस्तान को शामिल करने वाले किसी सुरक्षा ढांचे के साथ ढाका की नजदीकी क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन पर असर डाल सकती है.
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने हाल में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, समझौते का उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता मजबूत करना है. तीनों देश क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बढ़ाने के साथ अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को सुलझाने के प्रयासों में भी सहयोग करने पर सहमत हुए हैं.
बांग्लादेश के संभावित जुड़ाव से इस सुरक्षा व्यवस्था का दायरा बढ़ सकता है. यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश और पाकिस्तान का रिश्ता 1971 के इतिहास से जुड़ा है. दूसरी ओर, बांग्लादेश के नेतृत्व के सामने भारत के साथ अपने पुराने संबंधों और मुस्लिम देशों के साथ बढ़ते संपर्क के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी. फिलहाल ढाका ने कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया है, लेकिन उसकी संभावित दिलचस्पी क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस जरूर शुरू कर चुकी है.