कबूतरों के बाद बंदरों की चुनौती, BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में तैनात होंगे 'Monkey Whisperer'

दिल्ली में BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले आयोजकों ने बंदरों और पक्षियों से निपटने के लिए खास इंतजाम किए हैं. ‘Monkey Whisperer’ जब्बार की टीम लंगूर की आवाज की नकल कर बंदरों को दूर रखेगी.

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Ashutosh Rai

दिल्ली में होने वाली BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप को लेकर आयोजकों ने इस बार जानवरों से जुड़ी परेशानियों को रोकने की खास तैयारी की है. इंडिया ओपन में कबूतरों के कारण मैच रुकने के बाद अब बंदरों और पक्षियों को वेन्यू से दूर रखने के लिए अलग टीम और कई नए इंतजाम किए गए हैं.

इंडिया ओपन के बाद बदली तैयारी

जनवरी में इंडिया ओपन के दौरान कबूतरों ने एचएस प्रणय और लोह कीन यू के बीच मुकाबला दो बार रोक दिया था. इस घटना के बाद आयोजन स्थल की साफ-सफाई और दिल्ली की हवा को लेकर भी सवाल उठे थे. अब BAI और SAI ने इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले कई स्तर पर तैयारी की है. स्टेडियम को बेहतर बनाने पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. पहली और दूसरी मंजिल के 16 एंट्री गेट पर शीशे के दरवाजे और ऑटोमैटिक डबल-एंट्री सिस्टम लगाए गए हैं. इसी तैयारी के बीच बंदरों को रोकने के लिए चार लोगों की एक खास टीम भी तैनात की गई है, ताकि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों को किसी तरह की परेशानी न हो.

आवाज से बंदरों को भगाएंगे जब्बार

इस टीम में दिल्ली के जब्बार भी शामिल हैं, जिन्हें ‘monkey whisperer’ के तौर पर जाना जाता है. यह काम उन्होंने अपने परिवार से सीखा है और उनके पिता ने भी यही काम किया था. जब्बार के मुताबिक, उनकी टीम किसी केमिकल या मशीन का इस्तेमाल नहीं करती, बल्कि लंगूर की चेतावनी वाली आवाज की नकल करके बंदरों को दूर रखती है. उनका कहना है कि आवाज सुनते ही बंदर वहां से चले जाते हैं. टीम इस दौरान उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखती है और कोशिश करती है कि बंदर घबराकर सड़क की तरफ न भागें. इस काम के लिए टीम को टेंडर के तहत हर महीने 25 हजार रुपये मिलते हैं. हालांकि जब्बार बताते हैं कि इस काम में लगातार रोजगार की गारंटी नहीं है और दिल्ली के बड़े वेन्यू में ऐसे कई लोग अब यह तरीका सीख रहे हैं.


विरासत बचाने वाला काम

जब्बार के लिए यह सिर्फ बंदरों को दूर रखने का काम नहीं, बल्कि परिवार से मिली एक पुरानी कला भी है. उन्होंने बताया कि उन्होंने यह तरीका अपने पिता से सीखा लेकिन वह नहीं चाहते कि उनका बेटा भी आगे चलकर यही काम करे. दूसरी ओर, वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए स्टेडियम में तेजी से बदलाव किए जा रहे हैं. आयोजकों की कोशिश है कि खिलाड़ियों और दर्शकों को एक बेहतर माहौल मिले और जानवरों के कारण मैच में कोई रुकावट न आए. बंदरों के अलावा पक्षियों को लेकर भी तैयारी की जा रही है, ताकि जनवरी में हुई परेशानी दोबारा न हो.