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India Daily

भारत के पूर्व विकेटकीपर के नाम पर इंग्लैंड में बनेगा स्टैंड, हुआ बड़ा ऐलान

Farokh Engineer: लंकाशायर ने इंग्लैंड में भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज फारूख इंजीनियर के नाम स्टैंड बनाने के ऐलान किया है. बता दें कि फारूख इससे पहले लंकाशायर के लिए खेल चुके हैं.

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भारत के पूर्व विकेटकीपर के नाम पर इंग्लैंड में बनेगा स्टैंड, हुआ बड़ा ऐलान
Courtesy: Social Media

Farokh Engineer: इंग्लैंड के ऐतिहासिक ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भारत के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर और वेस्टइंडीज के दिग्गज क्लाइव लॉयड के सम्मान में स्टैंड का नामकरण किया जाएगा. यह घोषणा लंकाशायर काउंटी क्लब ने की है, जहां दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रचा था. यह समारोह भारत और इंग्लैंड के बीच चौथे टेस्ट मैच के दौरान होगा, जो 23 जुलाई से शुरू हो रहा है. 

फारुख इंजीनियर ने 1968 से 1976 तक लंकाशायर के लिए लगभग एक दशक तक खेला, जबकि क्लाइव लॉयड ने दो दशकों तक क्लब का प्रतिनिधित्व किया. दोनों ने अपने प्रदर्शन से लंकाशायर के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी. फारुख ने 175 मैचों में 5942 रन बनाए, 429 कैच लिए और 35 स्टंपिंग की. वहीं, लॉयड ने 1970 के दशक में क्लब की किस्मत बदल दी और उसे कई खिताब दिलाए.

फारुख इंजीनियर ने दिया था योगदान

जब फारुख लंकाशायर से जुड़े, तब क्लब 15 साल से अधिक समय से कोई बड़ा खिताब नहीं जीत पाया था. लेकिन उनके योगदान से लंकाशायर ने 1970 से 1975 के बीच चार बार जिलेट कप अपने नाम किया. लॉयड की कप्तानी और बल्लेबाजी ने भी क्लब को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.

स्टैंड नामकरण समारोह 

सूत्रों के अनुसार, यह स्टैंड नामकरण समारोह 23 जुलाई को टेस्ट मैच के पहले दिन हो सकता है. इस समय भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में इंग्लैंड 2-1 से आगे है. यह सम्मान दोनों दिग्गजों के लिए एक यादगार पल होगा.

लंकाशायर क्लब ने कहा, "यह दोनों खिलाड़ियों के लिए एक उचित सम्मान है, जिन्होंने क्लब के लिए अविस्मरणीय योगदान दिया." दिलचस्प बात यह है कि मुंबई में जन्मे फारुख के नाम पर उनके गृहनगर के ब्रेबोर्न स्टेडियम में कोई स्टैंड नहीं है, जहां उन्होंने अपने करियर का अधिकांश क्रिकेट खेला.

फारुख के यादगार पल

फारुख ने कुछ साल पहले लंकाशायर क्लब की वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में अपनी यादें साझा की थीं. उन्होंने बताया, "उन दिनों ओल्ड ट्रैफर्ड खेलने के लिए शानदार जगह थी. लोग दूर-दूर से हमें खेलते देखने आते थे. हम ड्रेसिंग रूम से वारविक रोड रेलवे स्टेशन देख सकते थे, जहां भारी भीड़ उतरती थी. लोग उत्साह से चिल्लाते और हंसते थे."