भारतीय क्रिकेट के इतिहास में लाला अमरनाथ सिर्फ एक शानदार बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि निडर व्यक्तित्व के लिए भी याद किए जाते हैं. 1954 में पाकिस्तान दौरे के दौरान उन्होंने ऐसी सूझबूझ दिखाई, जिसकी चर्चा आज भी होती है. पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के अंतिम मुकाबले से पहले हुई एक घटना ने उन्हें सतर्क कर दिया. इसके बाद उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे दौरे का माहौल बदल दिया.
भारत और पाकिस्तान के बीच शुरुआती चार टेस्ट ड्रॉ रहे थे. पांचवें टेस्ट से पहले पाकिस्तान के कप्तान अब्दुल हफीज कारदार ने भारतीय टीम मैनेजर लाला अमरनाथ को अपने कमरे में बुलाया. इसी दौरान अगले मैच के लिए नियुक्त अंपायर इदरीस बेग वहां पहुंचे. कमरे में लाला अमरनाथ को देखकर वह तुरंत बाहर निकल गए. इस घटना के बाद भारतीय मैनेजर को स्थिति पर शक हुआ.
लाला अमरनाथ ने भारतीय प्रबंधन के सामने स्पष्ट कहा कि अंतिम टेस्ट में इदरीस बेग अंपायर नहीं होने चाहिए. पाकिस्तान क्रिकेट प्रबंधन ने बताया कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का दूसरा अंपायर उपलब्ध नहीं है. इसके बावजूद लाला अपने फैसले पर अडिग रहे. उन्होंने कहा कि दूसरे अधिकारी शमसुद्दीन अंपायरिंग कर सकते हैं, लेकिन इदरीस बेग नहीं.
इस घटना को सालों से भारतीय क्रिकेट के चर्चित प्रसंगों में गिना जाता है. लाला अमरनाथ की सतर्कता और स्पष्ट रुख ने उन्हें एक मजबूत प्रशासक और निर्भीक क्रिकेट व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया. उनका निधन 5 अगस्त 2000 को हुआ था, लेकिन क्रिकेट जगत आज भी उन्हें सम्मान के साथ याद करता है.
लाला अमरनाथ ने 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई जिमखाना मैदान पर टेस्ट पदार्पण किया था. अपने पहले ही टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने 118 रन बनाकर इतिहास रच दिया. वह भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने. उनकी यह पारी भारतीय क्रिकेट के शुरुआती स्वर्णिम पलों में गिनी जाती है.
ऐतिहासिक शतक के बाद मैदान में मौजूद दर्शकों ने लाला अमरनाथ का अलग अंदाज में सम्मान किया. उस समय कई महिलाओं ने खुशी में अपने मंगलसूत्र और आभूषण मैदान की ओर उछाल दिए. यह दृश्य भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे अनोखी घटनाओं में शामिल हो गया और लाला अमरनाथ की लोकप्रियता का प्रतीक बन गया.