भारतीय क्रिकेट में करीब दो दशक तक सक्रिय रहे लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने अब मैदान को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है. उन्होंने शनिवार रात उत्तर प्रदेश टी20 लीग में कानपुर सुपरस्टार्स और मेरठ मावेरिक्स के मुकाबले के बाद संन्यास की घोषणा की. वह 25 अगस्त को लखनऊ चरण के आखिरी मुकाबले में अपनी टीम के लिए खेलेंगे. उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कर दिया है. ये खबर क्रिकेट फैंस के लिए किसी झटके से कम नहीं है.
कर्ण ने 2007-08 सीजन में फर्स्ट क्लास, लिस्ट ए और T20 क्रिकेट में कदम रखा था. शुरुआती दौर में वह ऑलराउंडर के तौर पर खेलते थे और रणजी पदार्पण में शतक भी लगाया था. 2012-13 सत्र उनके करियर का अहम मोड़ रहा. उन्होंने तीन रणजी मैचों में 19.04 की औसत से 21 विकेट लिए. इस प्रदर्शन के लिए उन्हें BCCI के सर्वश्रेष्ठ अंडर-25 क्रिकेटर का पुरस्कार मिला.
कर्ण को 2014 में इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय सीमित ओवरों की टीम में जगह मिली. इसी दौरे पर उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और जो रूट को आउट कर भारत के लिए अपना एकमात्र टी20 विकेट लिया. बाद में श्रीलंका के खिलाफ वनडे पदार्पण किया. उसी साल एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने एकमात्र टेस्ट खेला और दोनों पारियों में दो-दो विकेट लेकर कुल चार विकेट हासिल किए.
इंटरनेशनल क्रिकेट में लंबा मौका नहीं मिलने के बावजूद कर्ण का IPL सफर शानदार रहा. 2014 में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें 3.75 करोड़ रुपये में खरीदा था. वह उस समय सबसे महंगे अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी बने थे. 2016 में हैदराबाद, 2017 में मुंबई इंडियंस और 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ खिताब जीतकर कर्ण लगातार तीन अलग टीमों के साथ IPL ट्रॉफी जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने.
कर्ण ने 97 फर्स्ट क्लास मैचों में 270 विकेट लिए और 2,866 रन बनाए. वहीं लिस्ट ए के 123 मुकाबलों में उनके नाम 153 विकेट रहे. जबकि T20 क्रिकेट में उन्होंने 191 मैचों में 168 विकेट हासिल किए, जिनमें आईपीएल के 90 मैचों के 83 विकेट शामिल हैं. 2025 में मुंबई इंडियंस के लिए उनका आखिरी IPL मैच रहा. संन्यास के बाद कर्ण ने कोचिंग और क्रिकेट से जुड़ी अन्य भूमिकाओं में उपलब्ध रहने की बात कही है.