कपिल देव ने बिना पैसे-पावर के भारत को बना दिया क्रिकेट का बादशाह, जन्मदिन पर जानें उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें
भारतीय टीम के पूर्व महान कप्तान कपिल देव आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. उन्होंने भारत को क्रिकेट का पॉवरहाउस बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी.
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्हीं में से एक हैं कपिल देव. आज जब क्रिकेट में आधुनिक सुविधाएं बड़े कोच और अत्याधुनिक ट्रेनिंग सिस्टम मौजूद हैं, तब यह सोचना भी मुश्किल है कि बिना इन सबके कोई खिलाड़ी विश्व विजेता बन सकता है लेकिन कपिल देव ने यह कर दिखाया.
कपिल के न पास कोई खास संसाधन थे न ही बड़ी आर्थिक मदद फिर भी उन्होंने भारत को पहला वर्ल्ड कप जिताकर इतिहास रच दिया. उन्होंने भारत को वर्ल्ड क्रिकेट में एक पहचान दिलाई, जिससे क्रिकेट को लेकर भारत में क्रेज बढ़ा.
साधारण परिवार से असाधारण सफर
कपिल देव का जन्म 6 जनवरी 1959 को एक सामान्य परिवार में हुआ. देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार चंडीगढ़ में आकर बस गया. बचपन में न तो उनके पास महंगे क्रिकेट किट थे और न ही प्रोफेशनल कोचिंग की सुविधा. गली और लोकल मैदानों में खेलते हुए उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं. मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी.
घरेलू क्रिकेट से टीम इंडिया तक
कपिल देव ने घरेलू क्रिकेट में हरियाणा की ओर से खेलते हुए अपनी पहचान बनाई. उनकी तेज गेंदबाजी और अलग तरह का एक्शन बल्लेबाजों के लिए नई चुनौती था. साथ ही वे जरूरत पड़ने पर तेजी से रन भी बना लेते थे. इसी ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली. जल्द ही वे टीम इंडिया के भरोसेमंद खिलाड़ी बन गए.
कम उम्र में कप्तानी की जिम्मेदारी
अपने करियर के शुरुआती वर्षों में ही कपिल देव को भारतीय टीम की कप्तानी सौंप दी गई. उस समय टीम में बड़े नाम जरूर थे, लेकिन आत्मविश्वास की कमी साफ नजर आती थी. कपिल देव ने खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आज़ादी दी और खुद मैदान पर उदाहरण बनकर नेतृत्व किया.
1983 वर्ल्ड कप- जब बदली भारतीय क्रिकेट की तस्वीर
1983 के वर्ल्ड कप में भारत को कोई बड़ी टीम नहीं मानता था. सभी की नजरें मजबूत वेस्टइंडीज टीम पर थीं. लेकिन कपिल देव की कप्तानी में भारतीय टीम ने एक-एक मैच में खुद को साबित किया. ज़िम्बाब्वे के खिलाफ उनकी यादगार नाबाद 175 रन की पारी ने पूरे टूर्नामेंट का रुख बदल दिया. फाइनल में वेस्टइंडीज को हराकर भारत ने पहली बार विश्व कप अपने नाम किया.
बिना सुविधाओं के बना महान खिलाड़ी
आज के दौर की तुलना में उस समय खिलाड़ियों को न फिटनेस ट्रेनर मिलते थे, न वीडियो एनालिसिस. कपिल देव ने अपनी फिटनेस खुद बनाए रखी. उनका मानना था कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता. यही सोच उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है.
रिकॉर्ड और सम्मान
कपिल देव ने अपने करियर में कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए जो आज भी प्रेरणा हैं. उन्होंने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में शानदार प्रदर्शन किया. इसी वजह से उन्हें दुनिया के महान ऑलराउंडरों में गिना जाता है. उनके योगदान के लिए उन्हें कई बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले.