History of Olympics: ओलंपिक गेम्स के आगाज की बात होती है तो हम सभी यह जानते हैं कि इसका आगाज ग्रीस की मेजबानी में पहली बार 1896 में किया गया, हालांकि यह सवाल अक्सर उठता है कि इन खेलों को शुरू करने के पीछे का कारण क्या था. भले ही इस सवाल का कोई साफ या पुख्ता जवाब नहीं मिला हो लेकिन मान्यता है कि इसे ग्रीक मिथॉलजी से प्रेरित होकर शुरू किया गया था.
ग्रीक इतिहास में कई पौराणिक कथाएं हैं जिसमें गॉड ऑफ थंडर- थोर के माउंट ओलिंपस को जीत लेने के बाद शुरू किए गए खेलों को पहला ओलंपिक खेल बताया जाता है. इसके अनुसार जब पहली बार इन गेम्स को खेला गया था तब इन खेलों में लोग बिना कपड़ों के भाग लिया करते थे.
इतिहासकारों की मानें तो ग्रीस की प्राचीन कथाओं में जिन ओलंपिक खेलों का जिक्र है उसमें पुरुष एथलीट एक लंगोट बांधकर किसी भी खेल में हिस्सा लिया करते थे, हालांकि एक बार भागते हुए एक एथलीट की लंगोट खुट गई और इसके बावजूद वो भागता रहा. इस घटना से प्रेरणा लेकर बाकी एथलीट्स ने भी बिना कपड़ों के खेलना शुरू कर दिया.
ग्रीक मिथॉलजी के अनुसार उन दिनों इन खेलों में हिस्सा लेने वाले सभी एथलीट बहुत ताकतवर हुआ करते थे और मांसपेशियों की नुमाइश के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन करते थे. खेलों में हिस्सा लेने से पहले वो शरीर पर खूब सारा तेल मलते थे जिसके चलते ये और उभर कर नजर आती थी.
इतना ही नहीं इतिहासकार और एथेन के तत्वज्ञानी प्लेटो ने पांचवी सदी में कुछ तस्वीरें बनाई थी जो कि इन ओलंपिक खेलों का सबूत माने जाते हैं. इन तस्वीरों में पुरुष एथलीट ट्रैंक एंड फील्ड की स्पर्धाओं में बिना कपड़ों के नजर आते थे. इतना ही नहीं कुश्ती, बाक्सिंग, डिस्कस थ्रो और हॉर्स राइडिंग जैसे खेलों में भी ये एथलीट बिना कपड़ों के ही हिस्सा लेते नजर आते थे.
वहीं इस घटना का एक राजनीतिक कनेक्शन भी माना जाता है जिसके अनुसार इन खेलों में ग्रीक के अलावा पर्शिया के एथलीट भी हिस्सा लेते थे. जहां एक ओर ग्रीक एथलीट अपने शरीर के जरिए अपनी ताकत, आत्म-विश्वास और दबदबे का प्रदर्शन करते थे तो वहीं दूसरी तरफ पर्शिया के एथलीट अपना शरीर दिखाने से परहेज करते थे. ऐसे में जब ग्रीक के खिलाड़ी बिना कपड़ों के मैदान पर उतरते तो वो पर्शिया के खिलाड़ियों को मानसिक रूप से दबाने और खुद को उनसे बेहतर बताने की कोशिश करते थे.