भारतीय क्रिकेट में 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियां अभी से चर्चा में हैं. लगभग साल भर बाद होने वाले इस ICC इवेंट के लिए BCCI रोडमैप तैयार करने में जुट गई है. लेकिन अब सवाल यह है कि टीम मैनेजमेंट विश्व कप के लिए किस ऑलराउंडर को टीम में जगह देगी.
हार्दिक पंड्या फिट होकर वापसी की तैयारी में हैं और अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से उनके मैदान पर लौटने की उम्मीद है. करीब पांच महीने बाद वापसी करने वाले पंड्या के सामने वनडे में अपनी उपयोगिता साबित करने की चुनौती होगी. विश्व कप में अफ्रीकी परिस्थितियों को देखते हुए भारत को ऐसे ऑलराउंडरों की जरूरत होगी, जो गेंद और बल्ले दोनों से मुकाबले का रुख बदल सकें.
विश्व कप से पहले भारत एक ऐसे ऑलराउंडर की तलाश कर रहा है जोकि टीम को बल्ले और गेंद दोनों से संभाल सके. और ऐसे में अगर हार्दिक पूरी तरह फिट होते हैं तो वह ही सेलेक्टर्स की पहली पसंद होंगे.
फिट रहने पर हार्दिक पंड्या भारत के सबसे मजबूत ऑलराउंडर विकल्प होंगे. दक्षिण अफ्रीका की तेज और उछाल वाली पिचों पर उनकी तेज गेंदबाजी टीम को अतिरिक्त धार दे सकती है. बल्ले से भी उनका आक्रामक अंदाज उपयोगी रहेगा.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हार्दिक पिछले 5 महीने से क्रिकेट के मैदान से दूर हैं. इंजरी के कारण उन्हें पिछली कई टी20 सीरीज से बाहर होना पड़ा. इसके अलावा ज्ञात हो कि हार्दिक आखिरी बार पिछले साल वनडे 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में खेलते दिखाई दिए थे. विश्व कप तक उन्हें फिट रखने के लिए टीम मैनेजमेंट को उनके कार्यभार पर विशेष ध्यान देना होगा.
अगर किसी कारणवश हार्दिक टीम का हिस्सा नहीं बन पाते हैं तो उनकी गैरमौजूदगी में नितीश कुमार रेड्डी तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर के तौर पर प्रमुख दावेदार हो सकते हैं. हालांकि, फिटनेस उनके लिए भी चुनौती रही है. जांघ की चोट के कारण वह आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे से बाहर रहे. भारत के लिए 6 वनडे खेल चुके नीतीश के पास खुद को साबित करने का मौका है. अगर वह लगातार फिट रहते हैं और प्रदर्शन में निरंतरता दिखाते हैं, तो विश्व कप टीम में जगह बना सकते हैं.
भारत के पास ऑलराउंडर के रूप में कई विकल्प हैं, लेकिन 2027 विश्व कप को देखते हुए हार्दिक, नीतीश और सुंदर की दावेदारी खास दिखाई देती है. अक्षर पटेल और रविंद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के लिए इस बड़े टूर्नामेंट में वापसी की राह आसान नहीं मानी जा रही है. हालांकि, अंतिम फैसला प्रदर्शन, फिटनेस और टीम की जरूरतों पर निर्भर करेगा. फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता मजबूत और संतुलित कोर टीम तैयार करना है.