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India Daily

Harbhajan Singh Birthday: ट्रक ड्राइवर से विश्व कप विजेता तक... जानिए भज्जी का फर्श से अर्श तक का सफर

हरभजन सिंह का क्रिकेट सफर संघर्ष, आत्मविश्वास और शानदार वापसी की मिसाल है. टीम से बाहर होने, पारिवारिक जिम्मेदारियों और कठिन दौर के बावजूद उन्होंने वापसी कर भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल स्पिनरों में अपनी पहचान बनाई.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
Harbhajan Singh Birthday: ट्रक ड्राइवर से विश्व कप विजेता तक... जानिए भज्जी का फर्श से अर्श तक का सफर
Courtesy: X (@Cric46966)

भारतीय क्रिकेट जगत में बहुत सी ऐसी कहानियां होती हैं जोकि अरसों तक क्रिकेट प्रेमियों को प्रेरित करती हैं. उन्हें कहानियों में से एक है भारतीय क्रिकेट में हरभजन सिंह की कहानी. उनका नाम उन खिलाड़ियों में शामिल है, जिन्होंने मुश्किल हालात को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना दिया. शुरुआती असफलताओं, आर्थिक चुनौतियों और टीम से बाहर होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. एक समय तो ऐसा भी आया जब उन्होंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था. 

लेकिन परिवार के भरोसे, मेहनत और सही अवसर ने उनकी जिंदगी बदल दी. इसके बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जो आज भी याद किए जाते हैं. तो आज हम भज्जी के बर्थडे पर उनके उन संघर्षों के बारे में ही बात करने वाले हैं जिन्हें आगे चलकर उन्हें फर्श से अर्श तक पहुंचाया. 

कठिन दौर ने की तोड़ने की कोशिश 

3 जुलाई 1980 को जालंधर में जन्मे हरभजन सिंह ने कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा. भले ही भज्जी का डेब्यू जल्दी हो गया था लेकिन शुरुआती प्रदर्शन के बाद खराब फॉर्म के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा. इसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. जिसके बाद हरभजन परिवार की आजीविका चलाने के लिए अमेरिका जाकर ट्रक ड्राइवर बनने का मन बना चुके थे.

बहनों ने बढ़ाया हौसला

जब हरभजन पूरी तरह निराश थे, तब उनकी बहनों ने उनका आत्मविश्वास बनाए रखा. उन्होंने हरभजन को हारने नहीं दिया और दोबारा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया. जिसके बाद हरभजन ने रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 28 विकेट हासिल किए. यही प्रदर्शन उनके करियर की नई शुरुआत साबित हुआ और उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान फिर अपनी ओर खींचा.

गांगुली के भरोसे ने बदली किस्मत

साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज ने हरभजन के करियर को नई दिशा दी. कप्तान सौरव गांगुली ने उन पर भरोसा जताया और टीम में मौका दिलाया. हरभजन ने तीन मैचों की सीरीज में 32 विकेट लेकर गांगुली के भरोसे को टूटने नहीं दिया. कोलकाता टेस्ट में उन्होंने भारत की पहली टेस्ट हैट्रिक लेकर इतिहास भी रच दिया.

दूसरा बना सबसे बड़ा हथियार

हरभजन की ऑफ स्पिन के साथ उनकी रहस्यमयी ‘दूसरा’ गेंद ने दुनिया के बड़े बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया. टेस्ट क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेट लेने वाले वह भारत के पहले ऑफ स्पिनर बने. 

इतना ही नहीं वह 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के महत्वपूर्ण सदस्य रहे.