नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के 92 साल के इतिहास में जो कभी नहीं हुआ वो मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल में पिछले कुछ महीनों में हो गया है. इंदौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार केवल एक मैच की हार नहीं है, बल्कि यह उस पतन की मुहर है जिसने भारतीय क्रिकेट फैंस को सन्न कर दिया है.
गोतम गंभीर जिन्होंने अपने आप को बेस्ट बल्लेबाज और बेस्ट कप्तान बताया है. आज वर्स्ट कोच बनकर उभर रहे हैं. आने वाले समय में गंभीर की जॉब खतरें में दिख रही है.
इंदौर का होल्कर स्टेडियम भारतीय टीम का अभेद्य किला माना जाता था, जहां भारत कभी वनडे नहीं हारा था. कीवियों ने न केवल भारत को 41 रनों से हराया, बल्कि इतिहास में पहली बार भारत में वनडे सीरीज 2-1 जीतकर भारतीय क्रिकेट के गौरव को मिट्टी में मिला दिया. कोहली के 124 रन भी उस मलबे को नहीं छुपा पाए जो टीम की लचर गेंदबाजी और खराब रणनीति ने खड़ा किया था.
जब से गौतम गंभीर ने कमान संभाली है, टीम इंडिया जीत से ज्यादा अनचाहे रिकॉर्ड्स के लिए सुर्खियां बटोर रही है. फैंस पूछ रहे हैं कि क्या यह वही आक्रामक भारत है.
घरेलू पिचों पर सरेंडर: 12 साल बाद घर में टेस्ट सीरीज हारना और पहली बार न्यूजीलैंड के खिलाफ घर में टेस्ट और वनडे सीरीज दोनों गंवाना सबसे बड़ा कलंक है.
इतिहास की सबसे बड़ी हार: 408 रनों की हार और 124 रनों जैसा मामूली लक्ष्य न चेज कर पाना इस टीम की नई सच्चाई बन गई है.
शून्य पर आउट होने का सिलसिला: घर में 50 रन के नीचे ऑल-आउट होना और वांखेड़े में 147 रन का टारगेट न चेज पाना फैंस के लिए किसी सदमे से कम नहीं है.
सोशल मीडिया पर Sack Gambhir जैसे ट्रेंड्स चल रहे हैं. फैंस का गुस्सा जायज है क्योंकि 36 साल बाद घर में कीवियों से टेस्ट हारना और 25 साल बाद दक्षिण अफ्रीका से घरेलू सीरीज हारना बर्दाश्त से बाहर है. एक निराश फैन ने लिखा, "हम रिकॉर्ड बनाने के लिए जाने जाते थे, अब हम रिकॉर्ड तुड़वाने के लिए जाने जाते हैं. गंभीर के आने के बाद भारतीय क्रिकेट का ऑरा खत्म हो गया है."
इतिहास में पहली बार भारत WTC फाइनल की दौड़ से बाहर हो गया है. एडिलेड से लेकर मैनचेस्टर और लॉर्ड्स से लेकर इंदौर तक हार का यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. 17 साल बाद एडिलेड में वनडे हारना और 45 साल बाद एक कैलेंडर ईयर में एक भी वनडे जीत न पाना टीम की तैयारियों की पोल खोलता है.