फ्रांस और इंग्लैंड की टीमें वर्ल्ड कप फाइनल का सपना पूरा नहीं कर सकीं लेकिन अब दोनों के सामने तीसरे स्थान पर रहने का मौका है. यह मुकाबला सिर्फ ब्रॉन्ज मेडल का नहीं, बल्कि सम्मान, अनुभव और भविष्य की तैयारियों का भी अहम इम्तिहान माना जा रहा है.
फ्रांस के लिए यह मुकाबला कई मायनों में खास रहने वाला है. मुख्य कोच डिडियर डेसचैम्प्स आखिरी बार टीम की कमान संभालेंगे. उनके नेतृत्व में फ्रांस ने कई बड़ी सफलताएं हासिल की हैं और 2018 में वर्ल्ड कप भी जीता था. हालांकि इस बार टीम फाइनल तक नहीं पहुंच सकी लेकिन डेसचैम्प्स चाहते हैं कि विदाई जीत के साथ हो. उन्होंने साफ कहा कि तीसरे स्थान पर रहना चौथे स्थान से बेहतर है और टीम को देश के करोड़ों समर्थकों के लिए पूरी ताकत से खेलना होगा. अनुभवी खिलाड़ी एन'गोलो कांटे के लिए भी यह वर्ल्ड कप का आखिरी मैच हो सकता है, इसलिए यह मुकाबला भावनाओं से भी जुड़ा हुआ रहेगा.
इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस टुशेल पर इस मुकाबले में बड़ी जिम्मेदारी होगी. अर्जेंटीना के खिलाफ सेमीफाइनल में हार के बाद उनकी रणनीति पर सवाल उठे थे. खासकर हैरी केन के इस्तेमाल को लेकर काफी चर्चा हुई. अब तीसरे स्थान का यह मुकाबला उनके लिए आलोचनाओं का जवाब देने का मौका माना जा रहा है. इंग्लैंड की टीम चाहेगी कि वह टूर्नामेंट का अंत जीत के साथ करे और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़े. टीम के लिए यह मैच भविष्य की तैयारियों का भी अहम हिस्सा होगा, अगले बड़े टूर्नामेंट से पहले मजबूत प्रदर्शन जरूरी माना जा रहा है.
फ्रांस के कप्तान काइलियन एमबाप्पे इस मुकाबले से पहले चर्चा में हैं. उनकी फिटनेस को लेकर अभी पूरी तरह स्थिति साफ नहीं हुई है. अगर वह मैदान पर उतरते हैं तो फ्रांस की आक्रमण लाइन और मजबूत होगी. डेसचैम्प्स ने कहा कि एमबाप्पे जैसे खिलाड़ी को अलग से प्रेरित करने की जरूरत नहीं होती. दूसरी ओर इंग्लैंड भी पूरी तैयारी के साथ उतरेगा, दोनों टीमें टूर्नामेंट का अंत जीत के साथ करना चाहती हैं. भारतीय समय के अनुसार यह मुकाबला 19 जुलाई की सुबह खेला जाएगा. फुटबॉल प्रेमियों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि आखिर तीसरे स्थान का सम्मान किस टीम के नाम होगा.