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'फैमिली पॉलिसी नहीं हटेगी', BCCI सेक्रेटरी का कोहली को करारा जवाब!

हाल ही में जय शाह की जगह लेने वाले सचिव सचिव देवजीत सैकिया ने कहा, बीसीसीआई मानता है कि कुछ असंतोष या अलग-अलग राय हो सकती है, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है.

Gyanendra Sharma
'फैमिली पॉलिसी नहीं हटेगी', BCCI सेक्रेटरी का कोहली को करारा जवाब!
Courtesy: Social Media

सचिव देवजीत सैकिया ने बुधवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ( बीसीसीआई ) अपने अंतरराष्ट्रीय पुरुष क्रिकेटरों के लिए परिवार के साथ समय बिताने की सीमा तय करने वाली नीति में बदलाव नहीं करेगा. हाल ही में विराट कोहली ने इसकी खुलकर आलोचना की है. सैकिया ने कहा कि यह नीति 'राष्ट्र' और बोर्ड दोनों के लिए 'सर्वोपरि' है, उन्होंने कहा कि यह रातोंरात लिया गया निर्णय नहीं है. 

उन्होंने कहा कि हर 45-दिवसीय दौरे के लिए, परिवारों को क्रिकेटर के साथ दो सप्ताह की अनुमति दी जाएगी, सिवाय विशेष परिस्थितियों के जब बोर्ड उन्हें अनुमति देता है. इसके साथ ही अन्य नियम भी थे, जिसके तहत खिलाड़ियों को एक साथ यात्रा करना, अपना सामान कम रखना आदि अनिवार्य था. सैकिया ने क्रिकबज को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस समय, मौजूदा नीति बरकरार रहेगी, क्योंकि यह राष्ट्र और हमारी संस्था बीसीसीआई दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

हाल ही में जय शाह की जगह लेने वाले सचिव ने कहा, बीसीसीआई मानता है कि कुछ असंतोष या अलग-अलग राय हो सकती है, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है. यह नीति सभी टीम सदस्यों - खिलाड़ियों, कोचों, प्रबंधकों, सहयोगी कर्मचारियों और इसमें शामिल सभी लोगों पर समान रूप से लागू होती है. 

उन्होंने कहा कि यह नीति रातों-रात तैयार नहीं की गई है; यह दशकों से लागू है, हमारे अध्यक्ष रोजर बिन्नी के खेलने के दिनों से और संभवतः उससे भी पहले से. नई नीति पिछली नीति का संशोधन है, जिसमें अभ्यास सत्रों में खिलाड़ियों की उपस्थिति, मैच कार्यक्रम, दौरे, सामान, टीम की आवाजाही और अन्य सहायक गतिविधियों के बारे में अतिरिक्त प्रावधान हैं. 

बता दें कि अपनी आईपीएल फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कोहली ने कहा कि वह इससे 'काफी निराश' हैं और उनका मानना ​​है कि निर्णय लेने वालों में खिलाड़ियों की जरूरतों को समझने की कमी है.