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खिलाड़ी बार-बार क्यों हो रहे चोटिल? CoE पर सवालों के बीच VVS लक्ष्मण ने साफ किया रुख

भारतीय खिलाड़ियों की लगातार चोटों के बीच BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर सवाल उठ रहे हैं. वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि सीओई सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के विकास का केंद्र है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
खिलाड़ी बार-बार क्यों हो रहे चोटिल? CoE पर सवालों के बीच VVS लक्ष्मण ने साफ किया रुख
Courtesy: X (@BCCI)

भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों ने BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है. जसप्रीत बुमराह, साई सुदर्शन, हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ियों की फिटनेस ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है.

इसी बीच CoE प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने बेंगलुरु में कहा कि संस्थान की भूमिका केवल चोटिल खिलाड़ियों को ठीक करने तक सीमित नहीं है. उन्होंने चोटों के लिए किसी एक व्यक्ति या विभाग को जिम्मेदार ठहराने से भी इनकार किया.

चोट खिलाड़ियों के करियर का हिस्सा

लक्ष्मण के मुताबिक पेशेवर क्रिकेटरों के करियर में चोट लगना असामान्य नहीं है. उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि CoE केवल रिहैब सेंटर नहीं है. उनका मानना है कि ऐसी स्थिति में खिलाड़ियों की लगातार निगरानी जरूरी होती है.

उन्होंने जिम्मेदारी तय करने के बजाय प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम पर जोर दिया. लक्ष्मण ने साफ किया कि किसी एक विभाग को दोषी ठहराने से समस्या का समाधान नहीं होगा. सीओई का उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना और उनकी फिटनेस पर लगातार काम करना है.

बुमराह और सुदर्शन की चोट ने बढ़ाई चिंता

श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन बाहर हो चुके हैं. बुमराह की घुटने की चोट के बाद फ्लूइड रिटेंशन की समस्या उनकी वापसी में बाधा बनी है. वहीं सुदर्शन बाएं पैर के अंगूठे में दर्द के कारण जोखिम नहीं उठा सके. वह बेंगलुरु में अभ्यास कर रहे थे, लेकिन समय पर पूरी तरह फिट नहीं हो पाए.

हर्षित राणा की दोबारा चोट बनी सवाल

CoE को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हर्षित राणा की फिटनेस को लेकर हुई है. हैमस्ट्रिंग चोट के कारण करीब चार महीने बाहर रहने के बाद वह मैदान पर लौटे थे. लेकिन लगभग दो सप्ताह बाद उनकी वही समस्या फिर उभर आई. इससे रिटर्न-टू-प्ले प्रक्रिया और फिटनेस मंजूरी को लेकर सवाल उठे हैं. मामला यह जानने तक पहुंच गया है कि वापसी से पहले सभी जरूरी चरणों का सही तरीके से पालन हुआ था या नहीं.

नीतीश की बढ़ी गेंदबाजी पर नजर

नीतीश कुमार रेड्डी का मामला खिलाड़ियों के बढ़ते कार्यभार से जुड़ा है. वह गेंदबाजी की गति में करीब 7 से 8 किलोमीटर प्रति घंटे का सुधार करने पर काम कर रहे थे. इसके चलते गेंदबाजी का भार बढ़ा और हैमस्ट्रिंग तथा क्वाड्रिसेप्स पर असर पड़ा. इस घटना ने सवाल खड़ा किया है कि कौशल सुधार के दौरान बढ़ने वाले कार्यभार की निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से की जा रही है.