नई दिल्ली: सूर्य देव का प्रकोप जब अपने चरम पर होता है, तब तपती धूप और आसमान से बरसती आग, जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करती है. लोग गर्मी से निजात पाने के लिए दिन भर एयर-कंडीशनर (AC) वाले कमरों में कैद रहने को मजबूर हो जाते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हर वक्त कृत्रिम ठंडक के भरोसे रहना न तो व्यावहारिक है और न ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा. ऐसे में, प्राचीन भारतीय योग विज्ञान एक ऐसा मार्ग प्रशस्त करता है जिससे हम अपनी सांसों के माध्यम से शरीर के आंतरिक तापमान को नियंत्रित कर सकते हैं. दिल्ली स्थित 'उनालोम योग एंड वेलनेस स्टूडियो' की संस्थापक और योग विशेषज्ञ रिया व्यास ने इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रहने के लिए 'शीतली प्राणायाम' के महत्व पर जोर दिया है.
रिया व्यास के अनुसार, शीतली प्राणायाम मात्र एक श्वसन क्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के भीतर लगा एक प्राकृतिक एयर-कंडीशनिंग सिस्टम है. रिया इसे 'आंतरिक एयर-कंडीशनर' की संज्ञा देती हैं. यह तकनीक न केवल शरीर के बढ़े हुए तापमान को तत्काल कम करने में सक्षम है, बल्कि हमारे नर्वस सिस्टम को भी गहराई से शांत करती है. गर्मियों के दौरान होने वाली आम समस्याएं, जैसे कि अत्यधिक चिड़चिड़ाहट और मानसिक बेचैनी, को दूर करने में यह अभ्यास किसी रामबाण से कम नहीं है. जब भीषण गर्मी के कारण शरीर सुस्त और बोझिल महसूस करने लगे, तब इसके कुछ चक्र ऊर्जा को वापस संतुलित कर शरीर को पुनर्जीवित कर देते हैं.
इस प्राणायाम को करने की विधि जितनी सरल है, उतनी ही प्रभावशाली भी. अभ्यास के लिए सबसे पहले अपनी जीभ को बाहर निकालें और उसे एक नली या रोल की तरह मोड़ लें. अब इसी मुड़ी हुई जीभ के माध्यम से धीरे-धीरे और गहरी सांस अंदर की ओर खींचें. सांस लेते समय आप महसूस करेंगे कि एक ठंडी हवा, जिसे रिया 'शीत लहर' कहती हैं, जीभ के जरिए आपके शरीर में प्रवेश कर रही है. इसके बाद मुँह बंद करें और नाक के माध्यम से धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें. सांस छोड़ते समय महसूस करें कि शरीर की सारी गर्मी और बासी ऊर्जा बाहर निकल रही है. बेहतर परिणामों के लिए रिया व्यास रोजाना खाली पेट 10 से 15 बार इसके अभ्यास की सलाह देती हैं.
शीतली प्राणायाम के लाभ केवल ठंडक तक सीमित नहीं हैं. रिया के मुताबिक, जो लोग गर्मियों में अत्यधिक पसीना, थकान और ऊर्जा की कमी महसूस करते हैं, उनके लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है. इसके अतिरिक्त, यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, एसिडिटी जैसी पेट की समस्याओं को कम करता है और एंग्जायटी (घबराहट) को शांत कर नर्वस सिस्टम को रिसेट करने में मदद करता है. व्यायाम के बाद या चिलचिलाती धूप से घर लौटने पर यह शरीर को पुनः सामान्य स्थिति में लाने का सबसे बेहतरीन और प्राकृतिक तरीका है.