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उम्र 29 साल, फिटनेस 100 पर्सेंट, परेशानी सिर्फ डिप्रेशन, फिर भी कैसे इस लड़की को मिल गई इच्छामृत्यु?

Netherland Zoraya ter Beek: नीदरलैंड में, जर्मनी के बॉर्डर के पास रहने वाली जोरया टेर बीक ने इच्छामृत्यु का फैसला लिया है. वह मई में अपनी डॉक्टर की मदद से अपनी जान देने वाली हैं.

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What Is Euthanasia
Courtesy: Freepik

What Is Euthanasia: जीवन में हर कोई मुश्किलों का सामना कर रहा है. ऐसे में हार मान लेना इसका हल नहीं होता है. लेकिन दुनिया में कई ऐसे लोग जो हार मान जाते हैं और अपनी जान देने का फैसला करते हैं. ऐसी ही  नीदरलैंड की एक 28 साल की महिला कुछ ऐसा करने जा रही है. बता दें, महिला का नाम जोरया टेर बीक है. उसका एक बॉयफ्रेंड है और पालतू बिल्ली भी है. आइए जानते हैं प्यार मिलने के बाद और स्वास्थ्य बिल्कुल परफेक्ट होने बावजूद भी क्यों महिला मौत की मांग कर रही हैं. 

खबर के अनुसार, जोरया टेर बीक (Zoraya ter Beek)  नीदरलैंड में, जर्मनी के बॉर्डर के पास एक ग्रामीण इलाके में रहती हैं. वह मेंटल हेल्थ की बीमारी का सामना कर रही हैं. 28 साल की महिला ने अपने लाइफ में ऑटिज्म, डिप्रेशन और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी बीमारियों का सामना किया है. इसी कारण महिला ने मरने का फैसला लिया है. बता दें,उन्हें मई के महीने में इच्छामृत्यु (Woman euthanasia for mental health) दी जाएगी. 

क्यों लिया इच्छामृत्यु का फैसला

जोरया अपनी पूरी लाइफ मेंटल हेल्थ का शिकार रहीं. बता दें, वह साइकैट्रिस्ट बनना चाहती थी. खबर के अनुसार, जब डॉक्टर ने उनकी लेकर हाथ खड़े कर दिए तब जोरया ने  इच्छामृत्यु करने का फैसला लिया. क्योंकि वह इस बीमारी और अपनी लाइफ से बेहद परेशान हो गई थी और उनका मानना है कि वह कभी भी इस बीमारी से ठीक नहीं हो पाएगी और वह इस बीमारी के साथ वक्त भी नहीं बिता पाएंगी. 

नीदरलैंड में बढ़ रहे हैं इच्छामृत्यु के मामले

बता दें, साल 2001 में  नीदरलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश  बन गया था जिसने इच्छामृत्यु को लीगल कर दिया था. आंकड़े बताते हैं कि नीदरलैंड में साल 2022 में  8702 इच्छामृत्यु के मामले सामने आए थे. फिलहाल देश में कई ऐसे लोग हैं जो डिप्रेशन जैसी बीमारी का सामना कर रहे हैं और उनमें से कुछ इच्छामृत्यु की मांग कर रहे हैं. आम जनता ही बल्कि नीदरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री Dries van Agt और उनकी पत्नी ने हाथों में हाथ डाले इच्छामृत्यु द्वारा मरने का फैसला लिया था. बता दें, भारत में साल 2018 में इच्छामृत्यु को मंजूरी मिली थी.

क्या होती है इच्छामृत्यु ?

इच्छामृत्यु  में व्यक्ति को मरने की इच्छा होती है और वह डॉक्टर की मदद से अपनी जीवन का अंत करता है . ऐसा फैसला व्यक्ति इसलिए लेता ताकि वह बीमारी  या दर्द से छुटकारा पा सके. इच्छामृत्यु दो तरह की होती है एक एक्टिव यूथेनेशिया और दूसरा पैसिव यूथेनेशिया.  एक्टिव यूथेनेशिया में व्यक्ति को जहरीला दवा या इंजेक्शन देते हैं. वहीं पैसिव  यूथेनेशिया में डॉक्टर मरीज का इलाज रोक देते हैं. कता है. आइए जानते हैं ज्यादा आम खाने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं.