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केरल के इस मंदिर में लड़कियों की तरह क्यों सजते हैं मर्द? वजह पर नहीं होगा यकीन

Festival Of Kerala: केरल के कोलम जिले के देवी मंदिर में हर साल मार्च के महीने में 'चमयाविलक्कू' उत्सव (Chamayavilakku Festival) मनाया जाता है. इस त्यौहार की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे मनाने के लिए पुरुष महिलाओं की तरह तैयार होते हैं. इस अनोखे नजारे को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं.

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केरल के इस मंदिर में लड़कियों की तरह क्यों सजते हैं मर्द? वजह पर नहीं होगा यकीन
Courtesy: Social Media

Chamayavilakku Festival: हर साल, केरल के कोल्लम जिले के चावरा में कोट्टनकुलंगरा श्री देवी मंदिर में एक अनोखा उत्सव मनाया जाता है, जहां पुरुष भक्ति के रूप में महिलाओं की तरह सजते हैं. चमयाविलक्कु (Chamayavilakku Festival) के नाम से जाना जाने वाला यह त्योहार मार्च में 10-12 दिनों तक मनाया जाता है, जिसका समापन उस रात होता है जहां पुरुष, अपनी उम्र की परवाह किए बिना, महिलाओं के रूप में कपड़े पहनते हैं और देवी का सम्मान करने के लिए पांच बत्तियों से जलाए गए दीपक ले जाते हैं.

चामायाविलक्कू की परंपरा सदियों पुरानी है.  ऐसा कहा जाता है कि चरवाहे लड़के (Shepherd Boy) लड़कियों के वेश में, एक पत्थर के चारों ओर खेलते थे जिसे वे देवता के रूप में पूजते थे. एक दिन वह हैरान रह गए जब देवी पत्थर से उनके सामने प्रकट हुई. इस चमत्कारी घटना की खबर फैल गई, जिससे मंदिर की स्थापना हुई और उस परंपरा की शुरुआत हुई जहां पुरुष देवी को प्रसाद के रूप में महिलाओं की पोशाक पहनते हैं.

ट्रांसजेंडर समुदाय लेती है भाग

चामायाविलक्कू की परंपरा सदियों पुरानी है. यह उत्सव न केवल मंदिर के आसपास से बल्कि केरल के अन्य हिस्सों और पड़ोसी दक्षिण भारतीय राज्यों के लोगों को भी आकर्षित करता है. ट्रांसजेंडर समुदाय भी उत्साह के साथ भाग लेता है.  यह आयोजन आस्था का एक जीवंत प्रदर्शन है, जहां पुरुष दाढ़ी बनाते हैं, मेकअप करते हैं और रंगीन साड़ियां पहनते हैं, आशीर्वाद लेने और देवता से की गई मन्नत पूरी करने के लिए खुद को बदलते हैं.

'कक्काविलक्कू' फेस्टिवल

चामयाविलक्कू उत्सव स्थानीय संस्कृति में गहराई से समाया हुआ है. इस उत्सव में 'कक्काविलक्कू' नामक एक दिन का कार्यक्रम भी शामिल है, जहां 10 वर्ष से कम उम्र के लड़के लड़कियों की तरह कपड़े पहनते हैं और दीपक पकड़ते हैं। मुख्य कार्यक्रम चामयाविलक्कू, शाम को शुरू होता है और सुबह तक जारी रहता है. मंदिर रात 2 बजे से सुबह 5 बजे के शुभ समय के दौरान खुला रहता है और कई लोग इसे देखने के लिए यात्रा करते