सावधान! बिस्किट...आइसक्रीम और चाय बन सकते हैं मेंटल हेल्थ के दुश्मन, स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा
स्टडी के अनुसार, जंक फूड और मीठे पेय पदार्थ मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालते हैं और डिप्रेशन, स्ट्रेस व एंग्जाइटी का खतरा बढ़ाते हैं. संतुलित और पौष्टिक आहार मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है.
नई दिल्ली: दुनियाभर में खाए जाने वाले बिस्किट, चिप्स, आइसक्रीम, चॉकलेट और मीठे पेय जैसे स्नैक्स अब सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं. एक स्टडी के अनुसार अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और हाई फैट फूड का ज्यादा सेवन डिप्रेशन, स्ट्रेस और एंग्जाइटी जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है.
स्टडी में बताया गया है कि स्वीट ड्रिंक्स जैसे सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, चीनी वाली चाय-कॉफी और फ्रूट फ्लेवर ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकता है. वहीं बिस्किट, पेस्ट्री, केक, आइसक्रीम, चॉकलेट और कैंडी जैसे स्वीट स्नैक्स भी मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालते हैं. इसके अलावा चिप्स, फ्राइज, फास्ट फूड और अन्य तले-भुने खाद्य पदार्थ भी इस खतरे को बढ़ाते हैं.
विशेषज्ञों ने क्या बताया?
विशेषज्ञों के अनुसार इन अनहेल्दी फूड्स में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है. इनमें ट्रिप्टोफेन जैसे अमीनो एसिड कम होते हैं, जो सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में मदद करते हैं. सेरोटोनिन मूड, नींद और भावनाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी कमी मानसिक समस्याओं को जन्म दे सकती है.
इसके अलावा हाई फैट डाइट ब्रेन में मौजूद बीडीएनएफ यानी Brain-Derived Neurotrophic Factor के स्तर को कम कर देती है, जो न्यूरॉन की ग्रोथ और मूड नियंत्रण के लिए जरूरी होता है. इससे डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है.
कैसे पहुंचाता हैं शरीर को नुकसान?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड शरीर में सूजन यानी इन्फ्लेमेशन और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को भी बढ़ाते हैं. ये दोनों ही स्थितियां लंबे समय तक बनी रहने पर मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती हैं और एंग्जाइटी व डिप्रेशन से जुड़ी होती हैं.
एक और महत्वपूर्ण पहलू गट-ब्रेन एक्सिस है, जो आंत और दिमाग के बीच के संबंध को दर्शाता है. Harvard University के शोध के अनुसार, आंतों की सेहत का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है. खराब खानपान से गट बैक्टीरिया प्रभावित होते हैं, जिससे मूड और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
स्टडी में क्या आया सामने?
इस स्टडी में करीब 1.59 लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि जंक फूड का ज्यादा सेवन करने वालों में स्ट्रेस और डिप्रेशन के लक्षण 15 प्रतिशत अधिक थे. लंबे समय तक ऐसे फूड खाने से मानसिक रोगों का खतरा 16 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जबकि डिप्रेशन का जोखिम 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
हालांकि संतुलित आहार मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. Psychiatry Research के अनुसार, फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मछली, जैतून का तेल और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं.