पढ़ने के लिए चश्मे का सहारा लेने वाले करोड़ों लोगों के लिए खुशखबरी आई है. अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने Vizz Eye Drop को हरी झंडी दे दी है. इसे लेंस थेरैप्यूटिक्स ने विकसित किया है और यह दुनिया की पहली aceclidine-based आई ड्रॉप है, जिसे प्रिस्बायोपिया के लिए मंजूरी मिली है. माना जा रहा है कि यह खोज आंखों की देखभाल के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है.
कंपनी के अनुसार यह ड्रॉप आंख की पुतली को सिकोड़कर एक तरह का pinhole effect पैदा करती है. इससे गहराई (depth of focus) बढ़ जाती है और नजदीक की वस्तुएं साफ दिखने लगती हैं. खास बात यह है कि यह ड्रॉप पुतली पर असर डालती है लेकिन आंख की ciliary muscle को ज़्यादा उत्तेजित नहीं करती, जिससे सामान्य देखने की क्षमता प्रभावित नहीं होती. दवा की यह विशेषता इसे बाजार में मौजूद अन्य विकल्पों से अलग बनाती है.
FDA की मंजूरी तीन बड़े Phase-3 clinical trials के आधार पर दी गई है. CLARITY-1 और CLARITY-2 ट्रायल में 466 प्रतिभागियों को 42 दिनों तक रोज एक बार यह ड्रॉप दी गई. वहीं CLARITY-3 स्टडी में 217 प्रतिभागियों को छह महीने तक इसका उपयोग कराया गया. नतीजों में यह सुरक्षित और प्रभावी साबित हुई. विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा FDA में स्वीकृत होने वाली अमेरिका की पहली नई chemical entity है, जिसने प्रिस्बायोपिया के इलाज का नया रास्ता खोल दिया है.
कंपनी का कहना है कि Vizz के सैंपल अमेरिका में अक्टूबर 2025 से मिलने लगेंगे और साल के अंत तक यह व्यापक रूप से बाजार में उपलब्ध होगी. लेंस थेरैप्यूटिक्स के सीईओ ईफ़ शिमेल्पेनिंक ने कहा कि 'FDA की मंजूरी हमारे लिए ऐतिहासिक पल है. यह न सिर्फ कंपनी बल्कि उन 128 मिलियन अमेरिकियों के लिए भी राहत है जो नजदीक की धुंधली दृष्टि से जूझ रहे हैं.' कंपनी अब डॉक्टरों और आई-केयर प्रोफेशनल्स के साथ मिलकर इस दवा की बिक्री और वितरण की तैयारी कर रही है.
प्रिस्बायोपिया ऐसी स्थिति है जो आमतौर पर 45 साल की उम्र के बाद लगभग हर व्यक्ति को प्रभावित करती है. इस समस्या से निपटने के लिए अब तक चश्मे या लेंस पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन Vizz Eye Drop के आने से मरीजों को एक नई उम्मीद मिली है. अगर यह दवा लंबे समय तक सुरक्षित और असरदार साबित होती है, तो यह आंखों की देखभाल में बड़ी क्रांति साबित हो सकती है.