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मंदिरों और सिल्क साड़ियों का शहर अब बना ‘अफेयर कैपिटल’! कांचीपुरम में क्या हो रहा है?

एशले मैडिसन ने पिछले साल खुलासा किया कि तमिलनाडु का कांचीपुरम, जो आमतौर पर मंदिरों और रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जून 2025 के आंकड़ों के अनुसार देश में विवाह-संबंधों के प्रमुख केंद्रों में से एक बनकर उभरा है. ये आंकड़े बताते हैं कि जो कभी वर्जित माना जाता था, वह धीरे-धीरे सामान्य होता जा रहा है.

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Edited By: Antima Pal
मंदिरों और सिल्क साड़ियों का शहर अब बना ‘अफेयर कैपिटल’! कांचीपुरम में क्या हो रहा है?
Courtesy: pinterest

भारत को हम पारंपरिक और परिवार प्रधान देश मानते हैं, जहां शादी को पवित्र माना जाता है और 'हम दो, हमारे दो' का नारा चलता है. लेकिन बदलते समय के साथ रिश्तों का स्वरूप भी धीरे-धीरे बदल रहा है. एक लोकप्रिय एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप Gleeden के आंकड़ों ने इस बदलाव को साफ तौर पर दिखाया है.

मंदिरों और सिल्क साड़ियों का शहर अब बना ‘अफेयर कैपिटल’! 

इस ऐप पर भारत में यूजर्स की संख्या अब 40 लाख (4 मिलियन) से ज्यादा हो चुकी है. यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि समाज में रिश्तों, विवाह और व्यक्तिगत खुशी को लेकर बदलती सोच को भी दर्शाता है. कई विवाहित लोग साथी की तलाश में, भावनात्मक समर्थन या रिश्ते में कमी महसूस होने पर इस तरह के डिस्क्रीट प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर रहे हैं.

कांचीपुरम में क्या हो रहा है?

बेंगलुरु इस लिस्ट में सबसे टॉप पर है. यहां से कुल यूजर्स का 18 प्रतिशत हिस्सा आता है. उसके बाद हैदराबाद (17%), दिल्ली (11%), मुंबई (9%) और पुणे (7%) का नंबर आता है. आईटी हब वाले शहरों में इस ट्रेंड की ज्यादा सक्रियता दिख रही है, जहां व्यस्त लाइफस्टाइल, काम का प्रेशर और निजी समय की कमी रिश्तों को प्रभावित करती है. 

ऐप के यूजर्स में 65 प्रतिशत पुरुष और 35 प्रतिशत महिलाएं हैं. पिछले दो सालों में महिलाओं के रजिस्ट्रेशन में 148 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. कई महिलाएं भावनात्मक अकेलेपन को मुख्य वजह बताती हैं. यूजर्स ज्यादातर 25 से 50 साल की उम्र के बीच के हैं और टियर-1 तथा टियर-2 शहरों से आते हैं. 

Gleeden ने 2024 में 1,503 विवाहित भारतीयों पर एक सर्वे किया था. इसमें पता चला कि 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने स्विंगिंग, ओपन रिलेशनशिप और अन्य गैर-पारंपरिक रिश्तों की तरफ रुझान दिखाया. यूजर्स का सबसे ज्यादा एक्टिविटी लंच ब्रेक के समय (दोपहर 12 से 3 बजे) और रात 10 बजे के बाद होती है. 

एशले मैडिसन, जो विवाहेतर संबंधों को बढ़ावा देने के लिए जानी जाने वाली एक और वैश्विक ऐप है, ने पिछले साल खुलासा किया कि तमिलनाडु का कांचीपुरम, जो आमतौर पर मंदिरों और रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जून 2025 के आंकड़ों के अनुसार देश में विवाह-संबंधों के प्रमुख केंद्रों में से एक बनकर उभरा है. ये आंकड़े बताते हैं कि जो कभी वर्जित माना जाता था, वह धीरे-धीरे सामान्य होता जा रहा है.

स्निग्धा घोष (नाम बदला हुआ) मुंबई में मार्केटिंग विश्लेषक के रूप में काम करती हैं. भारत में बदलते रिश्तों और बेवफाई के बारे में पूछे जाने पर, वह कहती हैं- 'इसे खुलेआम होते देखना असामान्य नहीं है. ज्यादातर मामलों में, ऐसे संबंधों में शामिल लोग अच्छी तरह से वाकिफ होते हैं (जैसे पत्नी को अफेयर के बारे में पता होता है लेकिन वह चुप रहना पसंद करती है) और अब खुले विवाह की अवधारणा तेजी से बढ़ रही है.'