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उत्तराखंड में बाघों की सुरक्षा का नया प्लान, अब अग्निवीर संभालेंगे टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की कमान

उत्तराखंड सरकार ने राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (TPF) बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

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Edited By: Reepu Kumari
उत्तराखंड में बाघों की सुरक्षा का नया प्लान, अब अग्निवीर संभालेंगे टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की कमान
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: उत्तराखंड सरकार ने राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य वन्यजीव बोर्ड की 23वीं बैठक में टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (TPF) के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. इस विशेष सुरक्षा बल में सेना से लौटने वाले अग्निवीरों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है. यह व्यवस्था कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के मॉडल पर विकसित की जाएगी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका दोनों सरकार की प्राथमिकता हैं. उन्होंने वन्यजीव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने और आधुनिक तकनीक के अधिक उपयोग के निर्देश दिए. सरकार का लक्ष्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ संरक्षण कार्यों को और प्रभावी बनाना है.

कॉर्बेट मॉडल पर होगी नई सुरक्षा व्यवस्था

राजाजी टाइगर रिजर्व में बनने वाली टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का मुख्य दायित्व बाघों की सुरक्षा होगा. अधिकारियों के अनुसार, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में इस मॉडल से शिकार की घटनाओं में कमी आई है. अब इसी व्यवस्था को राजाजी में भी लागू किया जाएगा, जहां वर्तमान में 62 बाघ हैं. हाल के वर्षों में यहां बाघों के शिकार की कई घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई.

एआई तकनीक और आधुनिक निगरानी पर रहेगा जोर

बैठक में वन्यजीव संरक्षण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली, वन्यजीव कॉरिडोर के संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों और चारागाहों के विकास तथा वनाग्नि प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया. कुंभ-2027 के दौरान निगरानी बढ़ाने के लिए छह हाथियों की रेडियो कॉलरिंग का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय भी लिया गया. राजाजी टाइगर रिजर्व के हरिद्वार क्षेत्र में एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया.

वन्यजीव तस्करी रोकने के लिए नए अधिकार का प्रस्ताव

वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वन विभाग को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) प्राप्त करने का अधिकार देने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा. वर्तमान में इस तरह की जानकारी के लिए विभाग को पुलिस पर निर्भर रहना पड़ता है. सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था लागू होने से वन्यजीव तस्करी और शिकार से जुड़े मामलों की जांच अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी.

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के दौरान दूसरों की जान बचाने वाले साहसी नागरिकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाए. साथ ही, वन्यजीव हमलों में मृतक और घायल लोगों के परिजनों को तय मानकों के अनुसार समय पर मुआवजा उपलब्ध कराया जाए. सरकार ने 10 जिलों में रीजनल लेपर्ड ट्रांजिट ट्रीटमेंट एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की स्थापना के लिए 16 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र को भेजने और प्रत्येक जिले में प्रबंधन समितियों के गठन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश भी दिए हैं.