नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटा-सा सवाल आपकी जिंदगी बदल सकता है? अगर नहीं सोचा है, तो हम आपको एक ऐसा किस्सा बता रहे हैं, जिसमें एक छोटे-से सवाल ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जिंदगी बदल दी थी. अब यह सवाल क्या था और किस तरह से उनके जीवन में बदलाव आया था, चलिए जानते हैं.
जब एपीजे अब्दुल कलाम जब पांचवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब उनके टीचर ने उनसे एक सवाल पूछा था. उनसे पूछा गया था कि पक्षी कैसे उड़ते हैं. यह सवाल उनके मन में ऐसा बैठा कि आगे चलकर उन्होंने विज्ञान और एयरोस्पेस के क्षेत्र में अपना करियर बनाया. सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने देश के मिसाइल प्रोग्राम में भी अहम भूमिका निभाई.
डॉ. कलाम के जीवन से जुड़ा यह किस्सा उनकी किताब Reignited: Scientific Pathways to a Brighter Future में मिलता है. उस समय वह करीब 10 साल के थे. वो रामेश्वरम के एक स्कूल में पढ़ते थे. इनके साइंस टीचर शिवसुब्रमण्यम अय्यर ने बच्चों से पूछा कि आखिर पक्षी हवा में कैसे उड़ते हैं. टीचर ने ब्लैकबोर्ड पर पक्षी का चित्र बनाकर उड़ने का पूरा प्रोसेस समझाने की कोशिश की, लेकिन इस सवाल को बेहतर तरीके से समझाने के लिए वह बच्चों को रामेश्वरम के समुद्र तट पर ले गए. वहां बच्चों ने पक्षियों को उड़ते हुए देखा.
टीचर ने समझाया कि पक्षी अपने पंखों की मदद से हवा में आगे बढ़ते हैं और अपनी पूंछ से दिशा बदलने में मदद लेते हैं. साथ ही बताया कि प्लेन के उड़ने के पीछे भी कुछ ऐसा ही सिद्धांत होता है. डॉ. कलाम के लिए यह अनुभव बेहद खास था. उन्होंने महसूस किया कि विज्ञान केवल किताबों में पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि आसपास की दुनिया को समझने का तरीका भी है.
बचपन में डॉ. कलाम अखबार बांटने का काम भी करते थे. वह सुबह जल्दी उठकर रामेश्वरम स्टेशन से अखबारों के बंडल लेते थे. अखबार के पहले पन्ने पर हवाई जहाजों की तस्वीरें देखकर उनकी दिलचस्पी और बढ़ जाती थी. टीचर की उस क्लास ने उनके मन में उड़ान और विमान तकनीक को लेकर जिज्ञासा पैदा की. आगे चलकर उन्होंने फिजिक्स की पढ़ाई की और फिर एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में शिक्षा हासिल की. इसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक के रूप में अपना करियर शुरू किया.
डॉ. कलाम ने DRDO और ISRO में अहम योगदान दिया है. साल 1983 में शुरू हुए इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम में भी उनकी भूमिका काफी अहम रही. इस प्रोग्राम के तहत पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश और नाग जैसी स्वदेशी मिसाइलों के विकास पर काम किया गया. उनकी जिंदगी का यह किस्सा बताता है कि एक अच्छा टीचर केवल चैप्टर्स ही नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी जिज्ञासा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने की दिशा भी दे सकता है.