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अफसर ही बन रहे दोबारा अफसर! UPSC टॉप-130 में 39 पुराने चेहरे, क्या 'रैंक सुधार' के इस खेल से नए टैलेंट को हो रहा नुकसान?

यूपीएससी 2025 के नतीजों में 39 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने रैंक सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा दी. तीसरी रैंक वाले अकांक्ष धुल जैसे सफल अभ्यर्थियों ने नए नियमों और सीटों की बर्बादी पर नई बहस छेड़ दी है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम घोषित होते ही एक अनोखा रुझान सामने आया है. इस बार की मेरिट लिस्ट में शीर्ष 130 उम्मीदवारों में से 39 ऐसे हैं. जो पिछले दो वर्षों में भी अंतिम सूची का हिस्सा रह चुके थे. ये अभ्यर्थी पहले से ही किसी न किसी प्रशासनिक सेवा में तैनात थे, लेकिन उनका मुख्य लक्ष्य आईएएस बनना था. इस 'रैंक इम्प्रूवमेंट' के बढ़ते चलन ने सोशल मीडिया पर सीटों के नुकसान और चयन प्रक्रिया के नए नियमों पर व्यापक विमर्श को जन्म दिया है.

इस साल के नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा उन 39 चेहरों की हो रही है, जिनकी रैंक 130 से कम है. इसका सीधा मतलब यह है कि इस बार चयनित होने वाले आईएएस अधिकारियों में एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का है, जो पहले से ही सिस्टम का हिस्सा थे. अकांक्ष धुल, जिन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर तीसरी रैंक हासिल की है, इसका सबसे प्रमुख उदाहरण हैं. वे पिछले दो वर्षों से लगातार अपनी रैंक सुधारने के प्रयास में जुटे थे और अब सफल हुए हैं.

अकांक्ष धुल की सफलता उनकी अटूट लगन को बयां करती है. साल 2023 के रिजल्ट में उन्हें 342वीं रैंक मिली थी, जबकि 2024 में वे 295वें स्थान पर रहे. उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम करते हुए 2025 में शीर्ष तीन में जगह बना ली. उनके अलावा इशान आस्था जैन, जीनश्री जसवंत चंद्र और विनीत लोहिदक्षन जैसे कई अन्य उम्मीदवारों ने भी साबित किया है कि निरंतर प्रयास से आईएएस बनने का सपना पूरा किया जा सकता है.

रैंक सुधार की चुनौती और जज्बा 

दरअसल, कई बार अभ्यर्थियों को पहले चयन में आईपीएस (IPS) या आईआरएस (IRS) जैसी सेवाएं मिल जाती हैं. लेकिन प्रशासनिक सेवा के प्रति समर्पण उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए प्रेरित करता है. इसे 'रैंक इम्प्रूवमेंट अटेम्प्ट' कहा जाता है. इस साल करीब 35 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनका नाम 2023 या 2024 की सूचियों में भी मौजूद था. इन अभ्यर्थियों ने न केवल अपनी रैंक बेहतर की है, बल्कि खुद को आईएएस की सेवा के लिए अधिक सक्षम और मजबूत दावेदार के रूप में पेश किया है.

नए नियमों पर चर्चा और पाबंदी 

लगातार परीक्षा देने के इस सिस्टम को लेकर अब यूपीएससी ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है. नए नियमों के अनुसार यदि कोई उम्मीदवार एक बार आईएएस (IAS) सेवा प्राप्त कर लेता है, तो उसे दोबारा परीक्षा देने की अनुमति नहीं होगी. सोशल मीडिया पर लोगों का तर्क है कि इससे एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार सीटें घेरे जाने की समस्या खत्म होगी. नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक नए और प्रतिभावान युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में आने का मौका मिल सके.