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Success Story: 'ताने सुनता था रोज', मैथ्स में 41 अंक लाने वाला छात्र पहुंच गया IIT बॉम्बे; जानें जैनेंद्रजीत की सफलता का मंत्र

बिहार के पश्चिम चम्पारण के जैनेंद्रजीत की कहानी बताती है कि खराब रिजल्ट जिंदगी की आखिरी मंजिल नहीं होता. 10वीं में उन्हें सिर्फ 54 प्रतिशत अंक मिले थे और मैथ्स में 41 नंबर आए थे.

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Edited By: Reepu Kumari
Success Story: 'ताने सुनता था रोज', मैथ्स में 41 अंक लाने वाला छात्र पहुंच गया IIT बॉम्बे; जानें जैनेंद्रजीत की सफलता का मंत्र
Courtesy: instagram.com/_jainendrajeet_/

बेतिया: किसी छात्र के लिए 10वीं का रिजल्ट अक्सर उसके आत्मविश्वास से जुड़ जाता है. अगर अंक उम्मीद से कम आएं, तो आसपास के लोगों की बातें और ज्यादा चुभने लगती हैं. बिहार के पश्चिम चम्पारण के जैनेंद्रजीत ने भी ऐसा दौर देखा. उनकी 10वीं की मार्कशीट देखकर लोग मजाक उड़ाते थे. मैथ्स में सिर्फ 41 अंक और कुल 54 प्रतिशत ने उन्हें निराश कर दिया था. लेकिन उन्होंने उसी रिजल्ट को अपनी पहचान बनने नहीं दिया.

बीमारी ने बिगाड़ दी थी बोर्ड परीक्षा की तैयारी

जैनेंद्रजीत ने बेतिया के वृंदावन स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से पढ़ाई की. 10वीं की परीक्षा से पहले बीमारी के कारण उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा. करीब 40 से 50 दिन तक पढ़ाई प्रभावित होने से वह परीक्षा की तैयारी ठीक तरह से नहीं कर सके. नतीजे में उन्हें मैथ्स में 41, साइंस में 48 और हिंदी में 49 अंक मिले. सोशल साइंस में 54 और इंग्लिश में 79 अंक आए.

54 प्रतिशत के बाद सुनने पड़े ताने

रिजल्ट आने के बाद जैनेंद्रजीत के लिए स्थिति आसान नहीं थी. उन्हें उम्मीद थी कि बोर्ड परीक्षा में इससे बेहतर प्रदर्शन करेंगे, लेकिन मार्कशीट देखकर वह खुद भी निराश हो गए. उनके कई सहपाठियों के 90 प्रतिशत से अधिक अंक आए थे. दूसरी ओर, उन्हें अपने कम अंकों के कारण तानों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. यही अनुभव आगे चलकर उनके लिए खुद को साबित करने की वजह बना.

पढ़ाई का तरीका बदला और लक्ष्य बड़ा कर लिया

कम अंकों को लेकर बैठने के बजाय जैनेंद्रजीत ने आगे की तैयारी पर ध्यान लगाया. जेईई मेन और जेईई एडवांस की तैयारी के दौरान उन्होंने एक तय दिनचर्या बनाई. उन्होंने सोशल मीडिया और दूसरी ध्यान भटकाने वाली चीजों को सीमित किया. धीरे धीरे पढ़ाई का समय बढ़ाकर करीब 10 घंटे रोजाना कर लिया. बड़े लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटकर रोज के लक्ष्य पूरे करने पर उनका ध्यान रहा.

किताबों के साथ पुराने पेपर भी बने हथियार

जेईई की तैयारी में जैनेंद्रजीत ने केवल पढ़ाई के घंटे बढ़ाने पर निर्भर नहीं किया. क्लास से पहले वह शैक्षणिक वीडियो देखकर विषय की शुरुआती समझ बनाने लगे. इससे लेक्चर के दौरान कठिन अवधारणाओं पर ज्यादा ध्यान देने में मदद मिली. उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल किए और मॉक टेस्ट भी दिए. इससे परीक्षा के पैटर्न को समझने के साथ उनकी प्रश्न हल करने की क्षमता मजबूत हुई.

मेहनत का नतीजा JEE Main में दिखा

लगातार मेहनत और अनुशासन का असर परीक्षा के नतीजे में दिखाई दिया. जैनेंद्रजीत ने JEE Main 2023 में 99.98 परसेंटाइल हासिल की. इसके बाद JEE Advanced में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक 349 हासिल की. 10वीं के 54 प्रतिशत से शुरू हुआ यह सफर अब पूरी तरह बदल चुका था. जिस रिजल्ट को कभी लोग उनकी कमजोरी मान रहे थे, वही उनकी कहानी का शुरुआती मोड़ बन गया.

IIT बॉम्बे पहुंचकर बदल गई पूरी तस्वीर

JEE में शानदार प्रदर्शन के बाद जैनेंद्रजीत को IIT बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में दाखिला मिला. उनकी कहानी उन छात्रों के लिए उम्मीद देती है जो किसी एक परीक्षा या कम अंकों के कारण खुद को कमजोर समझने लगते हैं. उनका सफर दिखाता है कि एक खराब परिणाम भविष्य की सीमा तय नहीं करता. सही दिशा, लगातार मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो वही छात्र अपनी कहानी पूरी तरह बदल सकता है.