नई दिल्ली: UPSC की परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन सफलता के बाद भी प्रशासनिक सफर हमेशा आसान नहीं रहता. IAS नेहा मारव्या सिंह की कहानी इसका अलग उदाहरण है. उन्होंने 2010 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 100 हासिल की और मध्य प्रदेश कैडर में अधिकारी बनीं. करीब 14 साल के लंबे करियर के बाद उन्हें जनवरी 2025 में डिंडोरी का कलेक्टर बनाया गया था.
अब नेहा मारव्या सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन वजह उनकी कोई नई उपलब्धि नहीं, बल्कि लगातार हो रहे तबादले हैं. 5 सितंबर की ट्रांसफर लिस्ट में अपना नाम देखकर उन्होंने अपनी परेशानी जाहिर की. उनका कहना है कि एक साल के भीतर यह चौथी बार है, जब उनका ट्रांसफर हुआ है. उन्होंने यह बात मध्य प्रदेश IAS ऑफिसर्स एसोसिएशन को भेजे संदेश में भी रखी.
नेहा मारव्या सिंह ने मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. साल 2010 में उनकी मेहनत रंग लाई और UPSC CSE में उन्हें ऑल इंडिया रैंक 100 मिली. अंतिम परिणाम में उन्हें कुल 1224 अंक मिले थे. इसके बाद कैडर आवंटन में उन्हें मध्य प्रदेश मिला और वह 2011 बैच की IAS अधिकारी बनीं.
IAS बनने के बाद नेहा मारव्या सिंह ने मध्य प्रदेश में अलग-अलग प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वह राजस्व विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी और बाद में एडिशनल सेक्रेटरी जैसे पदों पर भी रहीं. हालांकि, कलेक्टर की जिम्मेदारी मिलने में उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा. 29 जनवरी 2025 को उन्हें डिंडोरी का कलेक्टर नियुक्त किया गया. जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उनका कार्यकाल 2 अक्टूबर 2025 तक रहा.
सितंबर 2026 में नेहा मारव्या सिंह के लगातार तबादलों की बात सामने आने के बाद मामला चर्चा में है. उन्होंने खुद बताया कि एक साल के भीतर उनका चौथी बार ट्रांसफर किया गया है. उनके अनुसार पिछली पोस्टिंग महज 50 दिन चली. 5 सितंबर की ट्रांसफर लिस्ट में फिर अपना नाम देखकर उन्होंने अपनी परेशानी जाहिर की. उन्होंने संदेश में लिखा कि जॉइन करने के 50 दिनों के अंदर ही उनका ट्रांसफर हो गया.
नेहा की कहानी में एक तरफ UPSC की बड़ी सफलता और लंबे प्रशासनिक अनुभव की तस्वीर दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ लगातार बदलती पोस्टिंग का दबाव भी सामने आता है. 2010 में AIR 100 हासिल करने से शुरू हुआ उनका सफर 2011 बैच की IAS अधिकारी बनने तक पहुंचा और करीब 14 साल बाद उन्हें कलेक्टर की जिम्मेदारी मिली. अब लगातार तबादलों को लेकर उनकी प्रतिक्रिया ने उनके प्रशासनिक करियर को फिर सुर्खियों में ला दिया है.