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इंस्टाग्राम पर छाए IAS तुकाराम मुंडे, फॉलोअर्स और एंगेजमेंट में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को पछाड़ा

महाराष्ट्र के एफडीए आयुक्त IAS तुकाराम मुंडे इंस्टाग्राम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से आगे निकल गए हैं.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
इंस्टाग्राम पर छाए IAS तुकाराम मुंडे, फॉलोअर्स और एंगेजमेंट में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को पछाड़ा
Courtesy: @IndianGems_

महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया पर राज्य के शीर्ष नेताओं को पीछे छोड़ दिया है. अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स और एंगेजमेंट रेट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से काफी अधिक हैं.

आंकड़ों में तुकाराम मुंडे की बढ़त

तुकाराम मुंडे के इंस्टाग्राम पर 34.15 लाख (3.415 मिलियन) फॉलोअर्स हैं और उनका एंगेजमेंट रेट 20.35 प्रतिशत है. इसके विपरीत, देवेंद्र फडणवीस के 29.02 लाख फॉलोअर्स (0.50% एंगेजमेंट) और एकनाथ शिंदे के 13.01 लाख फॉलोअर्स (0.24% एंगेजमेंट) हैं. मुंडे की यह लोकप्रियता उनकी सख्त कार्यप्रणाली और वायरल वीडियो के कारण बढ़ी है.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

कौन हैं IAS तुकाराम मुंडे?

तुकाराम हरिभाऊ मुंडे मई 2026 से महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं. वे देश भर में एक निडर, अनुशासित और बिना किसी समझौते के काम करने वाले नौकरशाह के रूप में जाने जाते हैं.

खाद्य सुरक्षा अभियान से मिली लोकप्रियता

एफडीए आयुक्त बनने के बाद मुंडे ने मिलावटखोरी और अस्वास्थ्यकर भोजन के खिलाफ 3,000 से अधिक छापेमारी की. उन्होंने रेस्टोरेंट में मुफ्त पीने का पानी अनिवार्य किया, नकली (एनालॉग) पनीर पर प्रतिबंध लगाया और वड़ा पाव को अखबार में लपेटने की पुरानी प्रथा को समाप्त कराया. उनके औचक निरीक्षण के वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल होते हैं.

25 तबादलों के बाद भी 'सिंघम' छवि

लगभग 21 वर्षों के करियर में तुकाराम मुंडे का 25 बार तबादला हो चुका है. बार-बार तबादलों के बावजूद जनता उन्हें एक ईमानदार अधिकारी मानती है जो राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकता. हाल ही में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट और मंत्रालय (राज्य सचिवालय) की कैंटीनों की भी जांच करवाकर उन्हें अस्थायी रूप से बंद करवा दिया था.

जल संरक्षण से मिला 'वाटरमैन' का नाम

FDA में आने से पहले मुंडे ने जालना और सोलापुर के जिलाधिकारी रहते हुए टैंकर माफिया पर शिकंजा कसा था और कई गांवों को सूखा मुक्त बनाया था, जिससे उन्हें 'महाराष्ट्र का वाटरमैन' कहा जाने लगा. उनके जीवन पर लिखी गई जीवनी की एक लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं.