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क्या चीन में होने जा रहा सैन्य तख्तापलट? 16 दिनों से गायब हैं शी जिनपिंग, इससे पहले भी कई नेताओं के साथ हुआ ऐसा

शी जिनपिंग लापता होने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं. बर्खास्त होने से पहले चीन के पूर्व विदेश मंत्री किन गैंग बिना किसी कारण बताए गायब हो गए थे.

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Edited By: Reepu Kumari
क्या चीन में होने जा रहा सैन्य तख्तापलट? 16 दिनों से गायब हैं शी जिनपिंग, इससे पहले भी कई नेताओं के साथ हुआ ऐसा
Courtesy: Pinterest

China Political Crisis 2025: चीन के अंदर ऊंची दीवारों, पहरेदार हॉल और खामोश सुर्खियों के पीछे कुछ हलचल हो रही है. इस बार, फुसफुसाहट इतनी तेज हो गई है कि उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. राष्ट्रपति शी जिनपिंग 16 दिनों तक लोगों की नजरों से ओझल रहे. न तो वे ज़र आए, न ही कोई बयान, न ही सरकारी अखबारों में कोई तस्वीर और न ही आधिकारिक चैनलों पर कोई रिपोर्ट. 21 मई से 5 जून, 2025 तक चीन का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बस गायब हो गया.

यह सिर्फ चुप्पी की बात नहीं थी. यह समय की बात थी. देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है. प्रमुख क्षेत्र दम तोड़ रहे हैं. पार्टी के भीतर मतभेद गहरा रहे हैं. और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के अंदर भी तूफान खड़ा होता दिख रहा है.

बंद दरवाजों के पीछे पार्टी गुटबाजी

शी की अनुपस्थिति के दौरान प्रधानमंत्री ली कियांग और उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग चुपचाप मंच पर आ गए. उन्होंने विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की और समारोहों में भाग लिया. बंद दरवाजों के पीछे पार्टी गुटबाजी चल रही थी. कुछ लोगों का कहना है कि यह केवल नियमित प्रबंधन नहीं था बल्कि नुकसान की भरपाई का प्रयास था.

कई नेताओं के साथ हुआ ऐसा

शी जिनपिंग लापता होने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं. बर्खास्त होने से पहले चीन के पूर्व विदेश मंत्री किन गैंग बिना किसी कारण बताए गायब हो गए थे. पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू के साथ भी ऐसा ही हुआ था. कोई घोषणा नहीं, बस चुप्पी साध ली गई और फिर उन्हें हटा दिया गया. अब, ताजा हलचल ने भय को फिर से जगा दिया है.

4 जुलाई 2025 को चीन सरकार ने तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया. इस सूची में जनरल मियाओ हुआ, नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल ली हनजुन और एक शीर्ष परमाणु इंजीनियर लियू शिपेंग शामिल थे. आधिकारिक कारण - भ्रष्टाचार.

लेकिन कई पर्यवेक्षक इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं.

कागज़ पर कहानी भ्रष्टाचार की है. लेकिन बीजिंग के राजनीतिक हलकों में एक और शब्द जो बार-बार सामने आता है, वह है विद्रोह. कुछ लोगों का मानना ​​है कि यह निष्कासन एक पूर्व-आक्रमण था. शी द्वारा शक्ति प्रदर्शन और अवज्ञा की सोच रखने वालों के लिए चेतावनी.

इससे तंत्रिकाओं को शांत करने में कोई मदद नहीं मिली है.

6 जून को, राज्य परिषद के तहत 50 से अधिक मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने शपथ ली. यह कार्यक्रम भव्य था. हॉल भरा हुआ था. लेकिन एक कुर्सी खाली रह गई - शी जिनपिंग की. चीन के राजनीतिक वर्ग में कई लोगों के लिए, यह अनुपस्थिति किसी भी भाषण से ज़्यादा ज़ोरदार थी.

हाल के महीनों में चीन की सत्ताधारी संरचना के अंदर विश्वास कम हुआ है. सत्ता अधिक केंद्रित, फिर भी अधिक असुरक्षित दिखाई देती है. लंबे समय से शी की लौह ढाल मानी जाने वाली सेना में दरार पड़ने लगी है.

आंतरिक असंतोष की बातें बढ़ रही हैं. कुछ लोगों का कहना है कि पीएलए के अंदर वफ़ादारी पहले जैसी नहीं रही. और महत्वपूर्ण मौकों पर शी की चुप्पी संदेह को और बढ़ाती है.

इसमें व्यापक संदर्भ जोड़ दें - अस्थिर अर्थव्यवस्था, बढ़ता जन असंतोष और बीजिंग की विदेशी उलझनें. अब आदर्श तूफान दूर की कौड़ी नहीं रह गया है.

तख्तापलट? अभी नहीं. लेकिन शी की सत्ता की महान दीवार में दरारें दिखने लगी हैं. और चीन में, चुप्पी कभी खाली नहीं होती.