सऊदी अरब की 83 अरब डॉलर की सेना हूतियों के सामने क्यों पड़ रही कमजोर? जानिए पूरा मामला
सऊदी अरब ने 2025 में करीब 83 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए और उसके पास F-15, यूरोफाइटर, पैट्रियट और THAAD जैसे आधुनिक हथियार हैं.
सऊदी अरब दुनिया की सबसे आधुनिक और महंगी सैन्य ताकतों में शामिल है. साल 2025 में सऊदी अरब ने अपनी जीडीपी का करीब 6.5 फीसदी यानी लगभग 83 अरब डॉलर रक्षा क्षेत्र पर खर्च किया था. इसके बावजूद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों ने उसकी एयर डिफेंस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
हाल के दिनों में सऊदी अरब पर कई लक्षित हमले हुए हैं. इनमें रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुआ हमला सबसे गंभीर रहा. शनिवार को हुए हमले में 12 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है. हमले के बाद कई देशों के राजनयिक मिशनों ने अपने नागरिकों को एयरपोर्ट से दूर रहने की सलाह दी.
सऊदी के पास आधुनिक हथियारों की बड़ी ताकत
सऊदी अरब ने अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत पश्चिमी देशों से बड़े पैमाने पर आधुनिक हथियार खरीदे हैं. उसके बेड़े में F-15 लड़ाकू विमान और यूरोफाइटर टाइफून जैसे अत्याधुनिक विमान हैं. इसके अलावा पैट्रियट और THAAD जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी उसकी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं.
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हाल ही में सऊदी अरब ने तुर्की और पाकिस्तान के साथ भी रक्षा समझौते किए हैं. हालांकि, देश की अपनी सैन्य औद्योगिक क्षमता सीमित है और वह आधुनिक हथियारों के लिए बड़े पैमाने पर दूसरे देशों पर निर्भर रहा है.
हूती कैसे दे रहे हैं चुनौती?
यमन में हूतियों ने पिछले एक दशक में अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी मजबूत किया है. 2014 में राजधानी सना पर कब्जे के बाद संगठन ने अपने हथियारों और युद्धक क्षमता में लगातार सुधार किया. हूती ड्रोन और मिसाइलों की पहुंच इजरायल तक होने का दावा भी सामने आया है, जो यमन से करीब 2,000 किलोमीटर दूर है.
हूतियों के पास अलग-अलग दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें और ड्रोन हैं. इनमें Palestine-2 जैसे मध्यम दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल और Toufan जैसे हथियार शामिल बताए जाते हैं. इसके अलावा Burkan और Badr सीरीज की छोटी दूरी की मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया जाता है. हूती अपनी रणनीति में एक साथ अलग-अलग गति वाले ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं. इससे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए सभी हमलों को एक साथ पहचानना और रोकना मुश्किल हो सकता है.
इतनी बड़ी सेना के बावजूद हमले क्यों नहीं रुक रहे?
विशेषज्ञों के मुताबिक समस्या केवल हथियारों की क्षमता की नहीं, बल्कि सऊदी अरब के विशाल क्षेत्रफल की भी है. देश करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. इतनी बड़ी जमीन पर हर समय हवाई सुरक्षा की मजबूत दीवार बनाए रखना बेहद मुश्किल है. सुरक्षा विशेषज्ञ थॉमस जूनो के मुताबिक सऊदी एयर डिफेंस कई हूती मिसाइल और ड्रोन को रोकने में सक्षम है, लेकिन देश का आकार इतना बड़ा है कि हर हमले को लगातार रोक पाना संभव नहीं है.
रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट का क्षेत्रफल ही करीब 225 वर्ग किलोमीटर है और यह शहर के केंद्र से लगभग 35 किलोमीटर दूर है. सऊदी अरब को एयरपोर्ट के साथ-साथ तेल संयंत्रों, सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण शहरों और अन्य रणनीतिक ढांचे की भी सुरक्षा करनी होती है.