नई दिल्ली: किसी अपने के लापता होने का दर्द उस समय और गहरा हो जाता है, जब परिवार को न उसके जीवित होने की खबर मिलती है और न ही कानूनी तौर पर उसकी मौत साबित करने का रास्ता मिलता है. नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं के कारण लापता हुए लोगों के परिवारों को अब इस लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने मृत घोषित करने की समय-सीमा में बड़ा बदलाव किया है.
नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल की ओर से जारी अध्यादेश के तहत अब आपदा में लापता व्यक्ति को कानूनी रूप से मृत घोषित करने के लिए 12 साल तक इंतजार नहीं करना होगा. यह अवधि घटाकर 45 दिन कर दी गई है. इस फैसले का असर उन परिवारों पर भी पड़ेगा, जो बाढ़ के बाद से अपने परिजनों की तलाश और जरूरी दस्तावेजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
नेपाल सरकार के इस फैसले से प्राकृतिक आपदाओं में लापता लोगों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया तेज हो सकेगी. पहले परिवारों को मृत्यु की कानूनी पुष्टि के लिए 12 साल तक इंतजार करना पड़ सकता था. अब नई व्यवस्था के तहत 45 दिन की समय-सीमा तय की गई है. अध्यादेश ऐसे समय लागू हुआ, जब 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के 45 दिन पूरे होने वाले थे.
बाढ़ के बाद से 5,285 लोग लापता बताए गए हैं. उनके परिवारों के सामने अपनों की तलाश के साथ-साथ कई कानूनी मुश्किलें भी थीं. मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना बीमा दावों, संपत्ति के उत्तराधिकार और दूसरी औपचारिकताओं को पूरा करना कठिन हो सकता है. नए नियम से इन प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है. लापता लोगों में कम से कम 189 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं.
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कैबिनेट की सिफारिश पर अध्यादेश जारी किया गया. लापता भारतीयों के मामलों में परिजनों को यह साबित करने वाले दस्तावेज देने होंगे कि संबंधित व्यक्ति 26 अगस्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मौजूद था. काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास इस जानकारी के सत्यापन के लिए नेपाली प्रशासन के साथ समन्वय करेगा. इसके बाद स्थानीय पंजीकरण कार्यालय नागरिकता संबंधी दस्तावेजों, पुलिस रिपोर्ट और दूतावास के प्रमाण पत्र के आधार पर आवेदन पर कार्रवाई करेंगे.