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लेबनान के एक गांव में मांस तक गला देने वाले कैमिकल से हमला, संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के दावे से सनसनी

ह्यूमन राइट्स वॉच ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उसने सात तस्वीरों की जांच कर उनकी पुष्टि की है. इन तस्वीरों से यह संकेत मिलता है कि लेबनान के दक्षिणी हिस्से में स्थित योहमोर गांव पर फॉस्फोरस आर्टिलरी का इस्तेमाल किया गया.

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब संघर्ष और गंभीर होता नजर आ रहा है. अमेरिका, ईरान और इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों के बीच लेबनान में एक नए विवाद ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है.

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने दावा किया है कि लेबनान के एक गांव पर सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया. यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है.

लेबनानी गांव में हमले का आरोप

ह्यूमन राइट्स वॉच ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उसने सात तस्वीरों की जांच कर उनकी पुष्टि की है. इन तस्वीरों से यह संकेत मिलता है कि लेबनान के दक्षिणी हिस्से में स्थित योहमोर गांव पर फॉस्फोरस आर्टिलरी का इस्तेमाल किया गया. यह हमला ऐसे समय में हुआ जब इजरायली सेना ने पहले ही दक्षिणी लेबनान के कई गांवों के निवासियों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हमले से कितने लोग प्रभावित हुए हैं.

अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की चेतावनी

मानवाधिकार संगठन ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि घनी आबादी वाले इलाकों में सफेद फॉस्फोरस का उपयोग अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है. इस पदार्थ के संपर्क में आने से इमारतों में आग लग सकती है और लोगों को गंभीर जलन हो सकती है. कई मामलों में यह जलन हड्डियों तक पहुंच जाती है, जिससे संक्रमण, अंगों की क्षति और फेफड़ों के काम करना बंद करने जैसी खतरनाक स्थितियां पैदा हो सकती हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच में लेबनान मामलों के शोधकर्ता रामजी कैस ने कहा कि अगर इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल नागरिक इलाकों में किया गया है तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है.

इजरायल की प्रतिक्रिया का इंतजार

अब तक इजरायली सेना ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है. हालांकि पहले भी इजरायल यह कह चुका है कि सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल धुआं पैदा करने के लिए किया जाता है, ताकि सैन्य गतिविधियों को छिपाया जा सके. सेना का कहना रहा है कि इसका उपयोग सीधे नागरिकों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाता.

तेहरान में तेल भंडारण केंद्र पर हमला

इसी बीच क्षेत्र में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया. ईरान की राजधानी तेहरान में एक तेल भंडारण केंद्र में आग लगने की खबर सामने आई है. वहां से उठती लपटों और धुएं के गुबार के वीडियो भी सामने आए हैं. इजरायल की सेना ने पुष्टि की है कि उसने तेहरान में ईंधन भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया.

विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि युद्ध के दौरान पहली बार किसी असैन्य औद्योगिक प्रतिष्ठान को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है. ईरान के सरकारी मीडिया ने इन हमलों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है.

नेतन्याहू की नई चेतावनी

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में बयान देते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष के अगले चरण में कई अप्रत्याशित कदम उठाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के पास एक विस्तृत योजना है और उनका उद्देश्य ईरान में मौजूदा सत्ता व्यवस्था को कमजोर करना है. हालांकि तेल भंडारण केंद्र पर हुए हमले को लेकर अमेरिका ने भी चिंता जताई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन ने इजरायल से इस कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई है. पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच यह साफ है कि क्षेत्रीय तनाव अभी कम होने के संकेत नहीं दे रहा. अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार अपील कर रहा है कि सभी पक्ष संयम बरतें, ताकि संघर्ष और व्यापक रूप न ले सके.