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नवरोज और ईद पर भी सामने नहीं आएं मोजतबा खामेनेई! टेलीग्राम से दिया संदेश, CIA और मोसाद कर रही तलाश

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ईद और नवरोज पर जनता के बीच नहीं आए. उन्होंने टेलीग्राम के माध्यम से लिखित संदेश दिया. जिसके बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
नवरोज और ईद पर भी सामने नहीं आएं मोजतबा खामेनेई! टेलीग्राम से दिया संदेश, CIA और मोसाद कर रही तलाश
Courtesy: X (@OpenSourceZone)

अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध का अब चौथा हफ्ता चल रहा है. इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. जिसके बाद वहां की असेंबली ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर नियुक्त किया. हालांकि पद संभालने के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं.

इस्लाम धर्म सबसे बड़ा पर्व ईद उल फितर मनाया गया. इस मौके पर भी ईरान के सुप्रीम लीडर ने केवल लिखित संदेश जारी हुए. जिसके बाद से उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अटकलें तेज हो गई है. ईरान की जनता नवरोज के दौरान परंपरा के मुताबिक सुप्रीम लीडर के लाइव संबोधन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 

टेलीग्राम चैनल पर आया संदेश

मोजतबा खामेनेई ने लाइव संबोधन के बजाय टेलीग्राम चैनल पर लिखित बयान और कुछ तस्वीरें जारी की गईं. राज्य टीवी पर बयान पढ़ा गया लेकिन कोई वीडियो या लाइव उपस्थिति नजर नहीं आई. जिसकी वजह से उनके स्वास्थ्य पर सवाल उठने. सीआईए और मोसाद जैसी एजेंसियां घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रही हैं.

ईरानी अधिकारी उनसे बैठकें कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि वे जीवित हैं, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं कि वे सक्रिय रूप से देश चला रहे हैं. एक इजरायली अधिकारी ने एक्सियोस को बताया कि हमारे पास इस बात का कोई सबूत नहीं कि वे वास्तव में आदेश दे रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा कारणों से वे छिपे हुए हैं. उनकी क्षमता सीमित हो सकती है.

ईद पर भी बाहर नहीं आए मोजतबा

ईरान के सुप्रीम लीडर ने शुक्रवार को ईद उल फितर और नवरोज पर मोजतबा का लिखित संदेश जारी किया. जिसे राज्य टीवी पर पढ़ा गया. उन्होंने अमेरिका इजरायल के हमलों को असफल बताया और कहा कि ये हमले देश को अस्थिर करने के लिए थे. उन्होंने कहा कि यह युद्ध इस भ्रम पर लड़ा गया कि शीर्ष नेताओं की हत्या से लोग डर जाएंगे और व्यवस्था गिर जाएगी. इसके उलट लोगों में एकता बढ़ी. मोजतबा ने कहा कि दुश्मन का सपना शासन बदलने का था. लेकिन यह भ्रम साबित हुआ. हमलों से जनता में भय नहीं फैला, बल्कि प्रतिरोध मजबूत हुआ. उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में ईरान ने तीन युद्ध झेले है, फिर भी एकजुट हैं.