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आसिम मुनीर की बढ़ती ताकत और दम तोड़ता पाकिस्तानी लोकतंत्र! क्या है 27वां संविधान संशोधन विधेयक

पाकिस्तान ने अपनी सेना की भूमिका को संवैधानिक रूप से मजबूत करने के लिए 27वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया है. इस प्रस्ताव से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को असीम शक्ति मिल सकती है और ये एक तरह से पाकिस्तान में सैन्य शासन की दिशा में बढ़ाया गया कदम साबित हो सकता है.

Kanhaiya Kumar Jha
Edited By: Kanhaiya Kumar Jha
army chief asim munir India Daily
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पाकिस्तान की संसद में पेश किया गया 27वां संविधान संशोधन विधेयक देश की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव ला सकता है.  इस विधेयक का उद्देश्य सेना की कमान को संवैधानिक दर्जा देना बताया जा रहा है, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सेना प्रमुख आसिम मुनीर की स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है. 

पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने क्या कहा?

कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने यह संशोधन पेश करते हुए कहा कि इससे रक्षा ढांचे का आधुनिकीकरण और नागरिक-सैन्य समन्वय बेहतर होगा.  प्रस्तावित संशोधन संविधान के अनुच्छेद 243 में बदलाव करेगा, जिससे सेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुखों की नियुक्तियां औपचारिक रूप से संविधान के तहत होंगी. 
हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव का जिक्र करते हुए तरार ने कहा कि युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए नए संवैधानिक समायोजन जरूरी हैं.  

7 मई को भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए.  इसके जवाब में पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई की लेकिन उसे मुंह की ही खानी पड़ी थी.

भारत से मिली हार के बावजूद 'प्रमोशन'

इन घटनाओं के कुछ दिन बाद ही जनरल आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत कर दिया गया. यह पद अब तक केवल जनरल अयूब खान के पास था.  कहा जा रहा है कि नया संशोधन मुनीर के इस पद को संवैधानिक दर्जा देगा, जिससे उनका कार्यकाल सुरक्षित हो जाएगा और उन्हें हटाना कठिन होगा. 

भारत के CDS की तरह कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का प्रस्ताव

संशोधन में कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नाम का नया पद भी बनाने का प्रस्ताव है, जो तीनों सेनाओं की निगरानी करेगा.  मुनीर को इस पद की कमान मिलने की संभावना जताई जा रही है.  इससे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास सशस्त्र बलों पर नियंत्रण सीमित हो सकता है.  इसके अलावा, प्रस्ताव में फील्ड मार्शल के कार्यकाल को अनिश्चित या बढ़ाने योग्य बताया गया है.  इससे मुनीर का प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है.