बांग्लादेश की राजनीतिक में उथल-पुथल मच गई है. विरोध प्रदर्शन के बाद शेख हसीना को धेश छोड़कर भागना पड़ा. सेना प्रमुख वकर-उज़-ज़मान ने घोषणा की है कि अस्थिरता के इस दौर में देश का मार्गदर्शन करने के लिए एक अंतरिम सरकार की स्थापना की जाएगी. बांग्लादेश में हो रही हिंसा में जमात-ए-इस्लामी संगठन का हाथ बताया जा रहा है. यह एक आतंकी संगठन माना जाता है.
1 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन छात्र शिबिर पर प्रतिबंध लगा दिया और उन्हें आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009 की धारा 18/1 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया. गृह मंत्रालय के सार्वजनिक सुरक्षा प्रभाग की अधिसूचना द्वारा पुष्टि किए गए इस निर्णय के बाद समूह के खिलाफ़ कई वर्षों तक आरोप और कानूनी कार्रवाइयां चलीं. सरकार ने पार्टी पर हिंसक विरोध प्रदर्शन भड़काने का आरोप लगाया जिसके परिणामस्वरूप 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई और हज़ारों लोग घायल हो गए. विरोध प्रदर्शन सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली के कारण शुरू हुए थे.
जमात-ए-इस्लामी की स्थापना मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े एक व्यक्ति सैय्यद अबुल अला मौदूदी ने की थी, जिसका उद्देश्य इस्लामी राज्य की स्थापना करना था. इसका नाम 'इस्लाम की सभा' है, जबकि छात्र शिबिर जो इसका छात्र विंग है, का अर्थ है 'छात्र शिविर'. संगठन की विचारधारा इस्लामी विजय को बढ़ावा देती है, जिसका उद्देश्य दुनिया को इस्लामी शासन के अधीन लाना है.
बांग्लादेश की आज़ादी के बाद से ही जमात-ए-इस्लामी की गतिविधिया विवादास्पद रही हैं. 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग करने के कारण बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व वाली पहली सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था. जमात के सदस्यों पर रजाकार, अल-बद्र, अल-शम्स और शांति समिति जैसे सहायक बलों के गठन में शामिल होने का आरोप लगाया गया था. ये बंगाली स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ अत्याचारों में शामिल थे, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाकर.
2013 में बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने एक अदालती फैसले के बाद जमात का पंजीकरण रद्द कर दिया था, इस निर्णय को 2023 में सुप्रीम कोर्ट के अपीलीय प्रभाग द्वारा बरकरार रखा गया. नवीनतम प्रतिबंध कानून मंत्रालय की सिफारिशों और अवामी लीग के नेतृत्व वाले 14-पार्टी गठबंधन के निर्णय के बाद लगाया गया है. जमात-ए-इस्लामी ने बांग्लादेश से बाहर भी अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति स्थापित की है. पाकिस्तान में यह अपनी छात्र शाखा इस्लामी जमीयत-ए-तलाबा के माध्यम से आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के बावजूद एक प्रमुख राजनीतिक ताकत बनी हुई है. इस संगठन के गाजा स्थित हमास, फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद और मुस्लिम ब्रदरहुड सहित विभिन्न आतंकवादी समूहों के साथ संबंध हैं.
यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में, जमात-ए-इस्लामी ने दक्षिण एशियाई अप्रवासी समुदायों के माध्यम से एक नेटवर्क स्थापित किया है. यह यूनाइटेड किंगडम में विशेष रूप से सक्रिय है. संयुक्त राज्य अमेरिका जमात की राजनीतिक भागीदारी का एक मजबूत समर्थक रहा है, अक्सर बांग्लादेश से समूह पर प्रतिबंध हटाने का आग्रह करता है.