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India Daily

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध से भारत के लिए बढ़ी टेंशन, जानें क्या होगा असर?

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध से भारत पर सीधा और बड़ा असर पड़ेगा. इस युद्ध के कारण तेल की कीमत से लेकर कई लोगों के घर उजड़ जाएंगे.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध से भारत के लिए बढ़ी टेंशन, जानें क्या होगा असर?
Courtesy: AI

Israel-Iran War: मिडिल ईस्ट  के तनाव ने अब महायुद्ध का रूप ले लिया है. इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर मिसाइलों की बौछार कर दी. इस कार्रवाई से पूरा मिडिल ईस्ट दहल गया है. इस युद्ध का सीधा असर भारत पर पड़ने वाला है. मिडिल ईस्ट में लाखों भारतीय रहते हैं. वहीं तेल की कमीतें भी आसमान छूने वाली है. इन सबकी बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत का अपने नागिरकों के लिए अगला आदेश क्या होगा. साथ ही इस युद्ध में भारतीय लोगों को कितना नुकसान होने की आशंका है. सबसे बड़ा दुख लाखों भारतीय लोगों का रोजगार छीनने का होगा. युद्ध के बीच सबको अपना बसा-बसाया घर छोड़ना पड़ेगा.

लाखों भारतीय फंसे

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट के देशों में भारतीयों की एक बहुत विशाल आबादी बसती है. इस महायुद्ध के बीच इन देशों में फंसे भारतीयों की स्थिति इस प्रकार है:

  • सऊदी अरब: 27 लाख
  • यूएई (UAE): देश की कुल आबादी का 35% भारतीय हैं
  • कुवैत: 10 लाख
  • कतर: 8.30 लाख
  • ओमान: 6,59,789
  • बहरीन: 3.40 लाख
  • इजरायल: 26,000 से अधिक
  • इराक: 25,000
  • जॉर्डन: 16,500
  • लेबनान, ईरान और यमन: 4,000 (प्रत्येक देश में)
  • तुर्की: 3,000
  • सीरिया: 39

भारत पर इसका असर

इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच इस सीधा टकराव के भारत के लिए बेहद गंभीर हो सकता है. इसका इन चार चीजों पर सीधा असर पड़ेगाः

कच्चे तेल की कीमतों में लगेगी आग

ईरान पर हमले का सीधा मतलब है हर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल सप्लाई का खतरे में पड़ना. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है. कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम आसमान छुएंगे, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और आम घरेलू महंगाई तेजी से बढ़ेगी.

नागरिकों की सुरक्षा और रेस्क्यू चुनौती

युद्ध के बेकाबू होने से वहां मौजूद लाखों भारतीयों की जान पर खतरा है. इतने बड़े पैमाने पर युद्ध भड़कने के बाद भारत सरकार के लिए अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण कूटनीतिक और दिक्कत भरी प्रक्रिया होगी.

रेमिटेंस पर भारी चोट 

पश्चिम एशिया से भारतीय हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत भेजते है. युद्ध के कारण वहां की अर्थव्यवस्थाएं और काम-धंधे ठप होंगे, जिससे भारतीयों के रोजगार छिनेंगे और इस आय में भारी गिरावट आएगी.

व्यापार और समुद्री मार्ग बाधित

लाल सागर और फारस की खाड़ी के आस-पास के व्यापारिक मार्गों पर यातायात पूरी तरह से रुक सकता है. इससे भारत का निर्यात और आयात बुरी तरह प्रभावित होगा. शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से हर तरह का व्यापार महंगा हो जाएगा.

भारतीयों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए

इस भीषण संकट के बीच, भारत का विदेश मंत्रालय (MEA) स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है. वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन कदम उठाए जा रहे हैं. इस बीच इंडियन एम्बेसी ने इन देशों में फंसे भारतीय नागिरकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. छात्रों ने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से जल्द से जल्द मदद की अपील की है.