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India Daily

Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू ऑपरेशन को मिली वैश्विक सराहना, जानें किसने क्या कहा? 

Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल से श्रमिकों को बाहर निकाले जाने के ऑपरेशन को वैश्विक सराहना मिली है.मजदूरों के रेस्क्यू की खबरें हमारे पड़ोसी पाकिस्तान और नेपाल के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की भी सुर्खियों में है.

Shubhank Agnihotri
Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू ऑपरेशन को मिली वैश्विक सराहना, जानें किसने क्या कहा? 

हाइलाइट्स

  • 17 दिन बाद सिलक्यारा टनल से बाहर आए सभी मजदूर
  • टनल रेस्क्यू ऑपरेशन पर क्या रही विदेशी मीडिया की प्रतिक्रिया

Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तराखंड में सिलक्यारा सुरंग में बीते 17 दिनों से फंसे मजदूरों को मंगलवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. इन श्रमिकों को बाहर निकाले जाने के ऑपरेशन को वैश्विक सराहना मिली है.मजदूरों के रेस्क्यू की खबरें हमारे पड़ोसी पाकिस्तान और नेपाल के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की भी सुर्खियों में है.

बीबीसी ने चलाईं श्रमिकों की तस्वीरें 

बीबीसी ने लिखा कि भारतीय रेस्क्यू टीम को बड़ी कामयाबी मिली है. टीम ने फंसे सभी 41 मजदूरों को बाहर निकाल लिया है. बीबीसी ने सुरंग से पहले व्यक्ति के बाहर निकलते ही अपनी वेबसाइट पर एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें सीएम धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह सुरंग से बाहर निकले श्रमिक से मिलते नजर आ रहे हैं. 

अलजजीरा ने क्या लिखा 


कतर स्थित समाचार चैनल अलजजीरा ने कहा कि 30 किमी दूर स्थित अस्पताल में श्रमिकों को ले जाने के लिए सुरंग के पास एम्बुलेंस को तैनात रखा गया था. अलजजीरा ने कहा कि श्रमिकों को पाइप के जरिए बाहर निकाला जा रहा है. 12 नवंबर को 4.5 किमी (2.8 मील) लंबी सुरंग के ढहने के बाद से मजदूर यहां फंसे गए थे. 

मशीनरी पर इंसानी जीत- द गार्डियन 

द गार्डियन ने अपनी खबर में लिखा कि हिमालय के पहाड़ों में 17 दिन तक फंसे रहने के बाद 41 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है. रेस्क्यू टीम ने एक-एक करके सभी 41 मजदूरों को बाहर निकाला है. अखबार ने कहा कि मानव श्रम ने मशीनरी पर विजय प्राप्त की. 


सीएनएन ( अमेरिका  )

सीएनएन ने लिखा कि टनल में फंसे सभी 41 मजदूरों को बचा लिया गया है. रेस्क्यू टीम ड्रिलिंग करते हुए श्रमिकों तक पहुंची है. सीएनए ने लिखा कि 17 दिन की मशक्कत के बाद मजदूरों को बाहर निकालने का रास्ता बनाया गया. मजदूरों को बचाने के लिए आखिरी दो मीटर हाथ से खुदाई करनी पड़ी है.