पिछले तीन हफ्तों से दुनिया की नजरें इस सवाल पर टिकी हैं कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में जमीनी सेना भेजेंगे. उनकी चुप्पी और अस्पष्ट बयानबाजी ने अटकलों को और तेज कर दिया है. इसी बीच, अमेरिकी युद्धपोत USS Tripoli के मध्य पूर्व की ओर बढ़ने की खबर ने हालात को और गंभीर बना दिया है. यह संकेत है कि ईरान संघर्ष अब एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर सकता है.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग है, जहां से लगभग 20% तेल और गैस गुजरती है. युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने यहां जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है. इससे वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आया है. कुछ टैंकरों को ही अनुमति दी गई है, जबकि पश्चिमी देशों के जहाजों को हमले की चेतावनी दी गई है.
🇺🇸🇮🇷 The U.S. sent the amphibious assault ship USS Tripoli, packed with over 1,600 Marines, sailing from the Pacific toward the Arabian Sea, two weeks after the first Epic Fury strikes.
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) March 20, 2026
It leads the Tripoli Amphibious Ready Group with USS San Diego and USS New Orleans, carries… https://t.co/oumEbVVWUM pic.twitter.com/JcCH7XK5YQ
अमेरिका के लिए इस जलमार्ग को फिर से खोलना प्राथमिकता बन गया है. सहयोगी देशों की धीमी प्रतिक्रिया के बीच, USS Tripoli पर तैनात मरीन सैनिक अहम भूमिका निभा सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के तट पर सीमित सैन्य तैनाती अपेक्षाकृत कम जोखिम भरा विकल्प हो सकता है, जिससे समुद्री मार्ग सुरक्षित किया जा सके.
ईरान का खार्ग द्वीप उसकी तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जहां से लगभग 90% निर्यात होता है. हालिया हमलों में इस द्वीप के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन तेल संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया गया. विश्लेषकों का मानना है कि इस द्वीप पर नियंत्रण अमेरिका के लिए रणनीतिक बढ़त साबित हो सकता है.
इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा बड़ा पहलू ईरान का समृद्ध यूरेनियम भंडार है. आशंका है कि इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है. इसे सुरक्षित करने के लिए जमीनी बलों की जरूरत पड़ सकती है. अगर अमेरिका सैनिक भेजता है, तो यह दो दशकों में पहली बड़ी जमीनी कार्रवाई होगी, जो क्षेत्रीय संतुलन बदल सकती है.