जल्द खत्म हो सकता है ईरान युद्ध! जेडी वेंस ने ईरान से निकलने के दिए संकेत, जानें क्या कहा?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान में लंबा युद्ध नहीं चाहता और जल्द ही सैन्य अभियान समेट सकता है. ट्रंप प्रशासन रणनीति को सीमित हस्तक्षेप तक रखने के संकेत दे रहा है.
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि वॉशिंगटन ईरान में लंबे समय तक मौजूद रहने का इरादा नहीं रखता और जल्द ही अपना मिशन समाप्त करना चाहता है. उनका बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों को 6 अप्रैल तक टाल दिया है. यह रुख संकेत देता है कि अमेरिका स्थिति को नियंत्रित रखते हुए बड़ा युद्ध टालना चाहता है.
सीमित हस्तक्षेप का संकेत
जेडी वेंस ने इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान में वर्षों तक चलने वाले जटिल सैन्य अभियान में उलझना नहीं है. उन्होंने बताया कि अमेरिका केवल जरूरी कार्रवाई कर रहा है, ताकि खतरा खत्म होने के बाद जल्द बाहर निकला जा सके. वेंस के अनुसार, यह रणनीति लंबे युद्ध में फंसने से बचने और संसाधनों के अनावश्यक उपयोग को रोकने के लिए बनाई गई है. उनके बयान को अमेरिकी नीति में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
हमलों को टालना बातचीत का संकेत?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर हमले की योजना को 10 दिनों के लिए रोक दिया था, जिसे अब 6 अप्रैल तक आगे बढ़ाया गया है. ट्रंप ने दावा किया कि यह कदम ईरान के अनुरोध पर उठाया गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत पहले से बेहतर स्थिति में है. यह निर्णय दर्शाता है कि अमेरिका इस समय सीधे युद्ध की दिशा में बढ़ने के पक्ष में नहीं है और कूटनीति को एक और मौका देना चाहता है.
ईंधन की कीमतों पर असर
वेंस ने कहा कि जैसे-जैसे हालात नियंत्रित होंगे, वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है. क्षेत्र में तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से प्रभावित किया है, जिसका प्रभाव दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में देखा गया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति का मानना है कि युद्ध की आशंकाएं कम होने पर ईंधन बाजार में गिरावट आ सकती है. उनका यह बयान आम उपभोक्ताओं और आर्थिक विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ईरान का पड़ोसी देशों को सख्त संदेश
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों को चेताया कि वे अपने क्षेत्र का उपयोग अमेरिका या किसी तीसरे देश द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियों के लिए न करने दें. यह संदेश खास तौर पर उन देशों के लिए माना जा रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. पेजेशकियान ने यह भी कहा कि ईरान किसी तरह के पूर्व-आक्रमण में विश्वास नहीं रखता, लेकिन उसके आर्थिक या सैन्य ढांचे पर कोई सीधा हमला हुआ तो उसका जवाब बेहद कठोर होगा.
28 फरवरी के हमले से भड़का विवाद
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच मौजूदा टकराव की शुरुआत 28 फरवरी के अमेरिकी हवाई हमले से हुई थी, जिसमें ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे. इसके बाद से हालात लगातार बिगड़ते गए और संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है. ईरान समर्थित गुटों और अमेरिकी ठिकानों के बीच कई बार झड़पें दर्ज की गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों की कूटनीतिक पहल ही इस तनाव को कम कर सकती है, अन्यथा हालात और बिगड़ सकते हैं.
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