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India Daily

इस हफ्ते पूरी दुनिया पर 15% तक टैरिफ बढ़ा सकता है अमेरिका, 5 महीनों में लागू हो सकता है पुराना टैरिफ

पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 10% का सार्वभौमिक आयात शुल्क लागू किया था. इससे पहले लगाए गए कई टैरिफ को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
इस हफ्ते पूरी दुनिया पर 15% तक टैरिफ बढ़ा सकता है अमेरिका, 5 महीनों में लागू हो सकता है पुराना टैरिफ
Courtesy: @DidDTrumpDie

अमेरिका इस सप्ताह अपने नए सार्वभौमिक आयात शुल्क को 10% से बढ़ाकर 15% कर सकता है. यह संकेत अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने दिया है. उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि टैरिफ बढ़ाने का फैसला जल्द लागू हो सकता है.

 150 दिनों तक लागू रह सकता है टैरिफ

पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 10% का सार्वभौमिक आयात शुल्क लागू किया था. इससे पहले लगाए गए कई टैरिफ को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था. बेसेंट ने साफ किया कि मौजूदा टैरिफ केवल 150 दिनों तक ही लागू रह सकते हैं. इस दौरान अमेरिकी अधिकारी पुराने टैरिफ ढांचे को दोबारा लागू करने के कानूनी रास्ते तलाश रहे हैं. उनका कहना है कि करीब पांच महीनों में शुल्क दरें फिर पहले जैसी हो सकती हैं.

उन्होंने बताया कि सेक्शन 301 और सेक्शन 232 जैसे प्रावधानों के तहत टैरिफ दोबारा लागू किए जा सकते हैं. ये प्रावधान राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुचित व्यापार व्यवहार से जुड़े मामलों में इस्तेमाल होते हैं.

वैश्विक व्यापार पर असर संभव

अगर अमेरिका टैरिफ 15% तक बढ़ाता है, तो इसका असर दुनिया भर के व्यापार पर पड़ सकता है. निर्यात पर निर्भर देशों, जैसे भारत, के लिए यह बड़ा मुद्दा बन सकता है. कंपनियां पहले से ही कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं और कई उद्योग अपने पैसे वापस मांग रहे हैं.

 तेल बाजार पर भी नजर

स्कॉट बेसेंट ने वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति है और घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि अमेरिका तेल ले जाने वाले जहाजों को बीमा देने और जरूरत पड़ने पर नौसेना के जरिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है, खासकर होरमुज जलडमरूमध्य के क्षेत्र में. बेसेंट ने यह भी कहा कि चीन की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी से आता है और ईरानी तेल की आपूर्ति फिलहाल रुकी हुई है. फिलहाल अमेरिका की नई टैरिफ नीति से वैश्विक व्यापार और तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. आने वाले हफ्तों में स्थिति और साफ हो सकती है.