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India Daily

ट्रंप को यीशु मसीह ने चुना, अमेरिकी सेना ने ईरान युद्ध को बताया भगवान की योजना

एमआरएफएफ के अध्यक्ष मिकी वाइनस्टीन ने इस तरह की भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि सेना में धार्मिक बयानबाजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश जा सकता है और कट्टरपंथी संगठनों को प्रचार का मौका मिल सकता है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
ट्रंप को यीशु मसीह ने चुना, अमेरिकी सेना ने ईरान युद्ध को बताया भगवान की योजना
Courtesy: @PicturesFoIder

ईरान से जुड़े तनाव के बीच अमेरिकी सेना के अंदर इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सैनिकों को एक ब्रीफिंग के दौरान बताया गया कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यीशु ने चुना है और ईरान से जुड़ा संघर्ष “भगवान की योजना” का हिस्सा है.

यह आरोप *सैन्य धार्मिक स्वतंत्रता फाउंडेशन (MRFF) की रिपोर्ट में सामने आया है. यह संगठन अमेरिकी सशस्त्र बलों में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए काम करता है.

200 से ज्यादा सैनिकों की शिकायत

एमआरएफएफ ने 3 मार्च को जारी अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि देशभर के लगभग 50 सैन्य ठिकानों से 200 से अधिक सैनिकों ने शिकायत की है. उनका कहना है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी मौजूदा सैन्य अभियान को धार्मिक नजरिए से पेश कर रहे हैं.

रिपोर्ट में एक गैर-कमीशंड अधिकारी (NCO) का बयान भी शामिल है. उन्होंने कहा कि एक कॉम्बैट रेडीनेस मीटिंग के दौरान एक कमांडर ने दावा किया कि ट्रंप को “यीशु द्वारा अभिषिक्त” किया गया है. साथ ही यह भी कहा गया कि ईरान से जुड़ा संघर्ष बाइबिल की भविष्यवाणियों से जुड़ा है.

‘बुक ऑफ रिवेलेशन’ का जिक्र

शिकायत में बताया गया है कि बैठक के दौरान बाइबिल की आखिरी किताब ‘बुक ऑफ रिवेलेशन’ का जिक्र किया गया. इस किताब में ‘आर्मगेडन’ यानी अंतिम युद्ध और यीशु के दोबारा पृथ्वी पर आने की बात कही गई है.बताया गया कि कमांडर ने कहा कि ट्रंप को ईरान में “संकेत की आग जलाने” के लिए चुना गया है, जो कथित तौर पर अंतिम युद्ध की शुरुआत का संकेत है.

संगठन ने जताई चिंता

एमआरएफएफ के अध्यक्ष मिकी वाइनस्टीन ने इस तरह की भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि सेना में धार्मिक बयानबाजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश जा सकता है और कट्टरपंथी संगठनों को प्रचार का मौका मिल सकता है.

फिलहाल अमेरिकी सेना की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. लेकिन इस मुद्दे ने सेना में धर्म और राजनीति के मिश्रण को लेकर नई बहस छेड़ दी है.